'आरटीआई अधिनियम में संशोधन लोकतंत्र का क्षरण'

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) के वेंकटेश नायक ने आईएएनएस से कहा, "सरकार ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सीआईसी के आदेश को निरस्त कर दिया। वे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में एक बार फिर विफल रहे, जिसका वादा वे अपनी हर घोषणा-पत्र में करते हैं।"
आरटीआई कार्यकर्ता शैलेश गांधी ने आईएएनएस से कहा, "यह एक घटिया निर्णय है। यह निश्चित तौर पर लोकतंत्र का क्षरण है। उन्हें कम से कम लोगों के साथ संवाद करना चाहिए, क्योंकि यह उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है।"
एक अन्य कार्यकर्ता सुभाष कुमार अग्रवाल ने कहा, "जब कभी राजनीतिक दलों के आपसी हितों की बात सामने आती है, जो आम तौर पर जनता के हित में नहीं होती तो उनके बीच सहमति आम बात होती है।"
कार्यकर्ता लोकेश बत्रा ने कहा, "सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें सीआईसी का निर्णय गैर-कानूनी लगता है और इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो उन्हें न्यायालय में याचिकाएं दायर करनी चाहिए।"












Click it and Unblock the Notifications