तेलंगाना से अलग होने पर सीमांध्रा की राजधानी बनाने में खर्च होंगे 2.5 लाख करोड़
हैदराबाद (प्रताप रेड्डी)। चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक रोटियां सेकने के लिये यूपीए सरकार ने तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग करने का फैसला ले लिया। लोग जो खुश हैं, वो मिठाईयां बांट रहे हैं, विरोधी बसें फूंक रहे हैं, मूर्तियां तोड़ रहे हैं, सड़कों पर जाम लगा रहे हैं और न जाने क्या-क्या कर रहे हैं। हंगामा काट रहे लोगों में क्या किसी ने सोचा है कि तटीय आंध्र प्रदेश यानी सीमांध्रा की राजधानी बनाने में कितना खर्च आयेगा? शायद आपने भी नहीं। इसका उत्तर है ढाई लाख करोड़ रुपए।
जी हां तेलंगाना को अलग करने के बाद हैदराबाद सीमांध्रा और तेलंगाना दोनों की राजधानी बनी रहेगी, लेकिन केवल दस साल तक। इसके बाद सीमांध्रा को खुद की राजधानी चाहिये होगी। एक ऐसा शहर जो नया रायपुर, भुवनेश्वर या गांधीनगर की तरह नियोजित शहर हो उसको राजधानी के रूप में विकसित करने में 2.5 लाख करोड़ रुपए का खर्च आयेगा। यह आकलन आईआईटी-दिल्ली के विशेषज्ञ और हैदराबाद के वाडा फाउंडेशन ने किया है। यह संस्था राजधानी के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर पर अध्ययन कर रही है। साथ ही राज्य का बंटवारा करने के बाद कई अन्य जगहों पर जो खर्च आयेगा वो अलग होगा।
एक राजधानी के लिये सबसे महत्वपूर्ण जरूरत होती है अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, सड़क परिवहन और प्रत्येक शहर से कनेक्टिविटी। वाडा फाउंडेशन के संस्थापक पी सुरेश राजू ने बताया कि ट्रेन और बस समेत शहरी ट्रांसपोर्ट तो बेहद जरूरी हैं। यही नहीं अन्य ट्रांसपोर्ट सुविधाएं भी लानी होंगी। इसके अलावा पावर ट्रांसमिशन, ग्रिड डिस्ट्रिब्यूशन, बैकअप सप्लाई, अंडरग्राउंड सीवेज और वॉटर सप्लाई, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधाएं अलग हैं। वाडा फाउंडेशन ने अपनी यह रिपोर्ट केंद्रीय कमेटी को भी सौंपी है, जो राज्य के विभाजन पर कार्य कर रही है।













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