किस ओर इशारा कर रहा है बसपा नेता हत्याकांड?

उत्तर प्रदेश सरकार ने आजमगढ़ के जीयनपुर कस्बे में सगड़ी के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू और उनके साथी भरत राय की हत्या और उसके बाद हुए बवाल में पुलिस फायरिंग के दौरान तीन लोगों की मौत के मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीअई) से जांच कराए जाने की सिफारिश कर विपक्षी दलों का मुंह बंद करने का भले ही प्रयास किया हो, पर सर्वेश के परिजन डा. सलीम मामले को याद कर कुछ ज्यादा आशान्वित नहीं हैं। सलीम हत्याकांड़ के बारे में बताया गया की शहर के हुर्रा चुंगी के पास रहमतनगर कालोनी में डा. सलीम अपने निजी मकान में बेटे यासिर सलीम, बेटी डा. समन सलीम व पत्नी शहनाज के साथ रहते थे।
वर्ष 2002 की 22/23 फरवरी की मध्य रात्रि डकैतों ने डा. सलीम को पूरे परिवार सहित मार दिया था। डा. सलीम के नजदीकी रिश्तेदार की याचिका पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने घटना की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी, मगर देश की इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी के हाथ एक भी आरोपी नहीं लगा। अंततः हार कर सीबीआई ने वर्ष 2005-06 में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीबीआई से ज्यादा हत्यारोपी चालाक होते हैं?
पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू के भाई संतोष सिंह टीपू का आरोप है कि ‘सर्वेश और भरत राय की हत्या और उसके बाद हुए बवाल के पीछे स्थानीय पुलिस की सोंची-समझी चाल थी। चूंकि सर्वेश निर्भीक और लोकप्रिय था, इसलिए उसकी हत्या करा दी गई।' वह कहते हैं कि ‘राजनैतिक रंजिश के अलावा एक विद्यालय संपत्ति को लेकर भी कुछ असरदार लोगों से उनका विवाद चल रहा था। साथ ही घटना के दिन सर्वेश अपने साथी भरत राय को लेकर कोतवाली गए थे, जहां इंस्पेक्टर विजय सिंह ने देख लेने की धमकी दी थी।' इन्होंने कहा कि ‘डा. सलीम हत्याकांड को याद कर एक बार लगता है कि स्थानीय पुलिस की तर्ज पर सीबीआई भी शायद रहस्य उजागर न कर पाए, पर मामले में किसी न किसी जांच एजेंसी पर भरोसा करना ही होगा।' सर्वेश की पत्नी वंदना सिंह कहती हैं कि ‘अब कुछ न्याय की उम्मीद बंधी है, पर अभी सिर्फ राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है केन्द्र सरकार की मुहर लगने में समय लग सकता है। ऐसे में आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बचाव का रास्ता ढूंढ़ सकते हैं।' वह भी कहती हैं कि ‘कहीं सीबीआई जांच में इस घटना का हश्र भी डा. सलीम हत्याकांड जैसा न हो जाए।'
वैसे राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच कराए जाने की सिफारिश के बीच मामले की मजिस्टेªटी जांच भी शुरू हो गई है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जे.के. सिंह ने बताया कि ‘मामले में शुक्रवार को अरविंद यादव, अमरनाथ सिंह, विश्वप्रकाश सिंह, नागेन्द्र सिंह, केशव सिंह, राजेश सिंह, सैयद रिजवान, मनोज जायसवाल, हवलदार सिंह, रामजनम सिंह, मनीष चैरसिया, श्यामबहादुर सिंह, राजकुमार, प्रमोद, पंकज सिंह, पिंटू सिंह, बलवंत सिंह, अशोककुमार व महताब आलम का बयान दर्ज किया गया है।'
उधर, पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन की माने तो इस हाईप्रोफाइल घटना को उजागर करने में पुलिस कोई कसर बांकी नहीं छोड़ना चाहती। एसपी ने बताया कि ‘घटना उजागर करने में पांच टीमें लगी हैं, एसटीएफ लखनऊ, क्राइम ब्रांच आजमगढ़ और मऊ, पुलिस क्षेत्राधिकारी सगड़ी सुनील कुमार के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस की टीम और एक टीम में जिले के कई क्षेत्राधिकारी शामिल किए गए हैं, जिनकी कमान वह खुद संभाले हैं।' इन्होंने बताया कि ‘अब तक कई जगह दविश देकर सैकड़ों लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।' उन्हें भरोसा है कि मामला सीबीआई के हाथ जाने से पूर्व काफी हद तक घटना उजागर कर ली जाएगी।
कुल मिलाकर उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई सीबीआई जांच में डा. सलीम हत्याकांड़ की गुत्थी न सुलझ पाने से सर्वेश सिंह सीपू के परिजन आशान्वित कम सशंकित ज्यादा हैं, अब देखना यह होगा कि इस मामले में सीबीआई घटना के सूत्रधार और वास्तविक आरोपियों तक पहुंच पाएगी या फिर डा. सलीम हत्याकांड़ के सरीखे बेनतीजा रहेगी, चूंकि अब तक की जांच पड़ताल में स्थानीय पुलिस कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पायी।












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