केन्द्र ने नीतीश के सुशासन की खोली पोल, कहा लापरवाही में गई 23 बच्चों की जान
पटना। बिहार के छपरा में हुए मिड डे मील हादसे के बाद नीतीश सरकार और विपक्षी दल एक दी दूसरे पर साजिश रचने का आरोप-प्रत्यरोप लगा रहे है। वहीं इस हादसे के बाद केंद्र सरकार की ओर से जारी एक रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दावों की कलई खोल कर रख दी है। केन्द्र सरकार की इस रिपोर्ट क बाद के नीतीश सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय है। केन्द्र सरकार की ओर से जारी किए गए इस रिपोर्ट जो में अहम बात सामने आई है उसके मुताबिक अगर नीतीश सरकार समय रहते सचेत होती तो 23 मासूम बच्चों की जानें नहीं जाती।
केंद्र की इस रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि घटना वाले दिन बच्चों के मना करने के बावजूद उन्हें खाना खाने के लिए मजबूर किया गया। नीतीश के सुशासन का दावों का पोल खोलती ये रिपोर्ट अब नीतीश सरकार के लिए मुसिबतें बढ़ाने वाली है। छपरा मिड डे मील हादसे के बाद केंद्र के ज्वॉइंट सेक्रेटरी अमरजीत सिंह ने अपनी रिपोर्ट में नीतीश के सुशासन की पोल खोल दी है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक जिस दिन ये हादसा हुआ उस दिन सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बदबूदार और कड़वा खाना परोसा गया। खाना खराब होने के कारण बच्चों से खाना छोड़ दिया, जिसके बाद टीचर से जबरन बच्चों को डांटकर खाना खिलाया। जहरीला खाना खाने के बाद बच्चों की तबियत बिगड़ने लगी। वहीं इस मामले में खुलासा हुआ है कि स्कूल की प्रिसिंपल मीना देवी ने अपने पति की दुकान से ही सामान खरीदा था। खाने के लिए लाया गया सामान सही था। इसके अलावा सरकार नियम होने के बावजूद स्कूल की प्रिंसिपल मीना देवी ने खाना टेस्ट नहीं किया।

रिपोर्ट से खुली नीतीश के सुशासन की पोल
केन्द्र सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी अमरजीत सिंह द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट नीतीश के सुशासन पर सावल खड़ा करते हुए कहा गया है कि आखिर ये कैसे संभव है कि प्रिसिंपल के पति की दुकान से ही सामान आ रहा था और अधिकारी को इसकी सूचना नहीं थी।

केन्द्र की चेतावनी के बावजूद नहीं हुआ सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार की चेतावनी के बावजूद भी मिड डे मील की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं किया गया। बच्चों के बीच बंटने वाला खाना दुषित और विषाक्त होने की वजह से 23 बच्चों की मौत हुई। हलांकि इस रिपोर्ट में छपरा प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा किया है। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और अफसरों ने घंटों तक कुछ नहीं किया।

प्रिसिंपल की मनमानी का किसी ने नहीं किया विरोध
विषाक्त खाना खाने के बाद स्कूल में बीमार बच्चों को छोड़कर प्रिसिंपल भाग खड़ी हुई। बीमार बच्चों को देखने वाला कोई नहीं था। सरकारी अधिकारी और जिला अस्पताल के डॉक्टर बच्चों को बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाए। रिपोर्ट के मुताबिक अगर समय रहते कार्रवाई ठीक से होती तो और बच्चों की जानें बचाई जा सकती थी।

नीतीश की वजह से हुआ हादसा
केन्द्र सरकार की इस रिपोर्ट में इस पूरे हादसे और बच्चों की मौत के लिए नीतीश सरकार को दोषी ठहराया गया है। इसे लापरवाही का नतीजा बताया गया है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक मिड डे मील योजना के अमल में कई कमियां है। केंद्र की रिपोर्ट से साफ है कि अगर नीतीश सरकार मिड-डे मील योजना सही तरीके से लागू करती तो ये हादसा नहीं होता।

नीतीश के विरोध में यूपीए की रिपोर्ट
नीतीश सरकार की पोल खोलती इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जेडीयू सरकार ने राज्य में मिड डे मील योजनाओं को लेकर लापरवाही बरती है। इसी लापरवाही की वजह से ये हादसा हुआ और 23 बच्चों ने अपनी जिंदगी को दी।












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