राजा भैया नहीं बुंदेलखंड की कीजिये फिक्र, जिसे अखिलेश ने भी छला
[अजय मोहन] उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 16 महीनों में तीसरी बार मंत्रीमंडल का विस्तार किया। इस विस्तार के दौरान यूपी के मीडिया को कुंडा के बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बड़ी चिंता थी। उन्हें जगह नहीं मिली तो खबरें तूफान की तरह दौड़ने लगीं, लेकिन बुंदेलखंड एक बार फिर उपेक्षित रह गया, इसकी किसी को फिक्र नहीं। खुद सीएम साहब को भी नहीं।
सबसे पहले हम आपको उस कार्यक्रम में लेकर चल रहे हैं, जो झांसी में हुआ था और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। चुनाव जीतने के बाद पहली बार झांसी गये अखिलेश यादव ने कहा था, "समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जीत की शुरुआत बुंदेलखंड से की थी। हम आपको विश्वास दिलाना चाहते हैं कि आने वाले पांच सालों में बुंदेलखंड की दिशा और दशा दोनों बदल जायेगी।" अब अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बने एक साल के ऊपर हो चुका है, लेकिन बुंदेलखंड में विकास के क्षेत्र में फिलहाल कोई बड़ी उपलब्धि नहीं दिखाई दी है।

पहली और दूसरी बार तो बुंदेलखंड के विधायकों को चांस नहीं मिला तो वो कुछ नहीं बोले, लेकिन एक बार फिर मिली इस उपेक्षा से शायद सपा विधायकों में फूट पड़ जाये। हो भी क्यों न बुंदेलखंड में 19 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें पांच सपा के पास हैं। और पांच में से एक भी विधायक मंत्रीमंडल में नहीं आ सका।
हर किसी ने छला बुंदेलखंड को
बुंदेलखंड को छलने की बात करें तो अखिलेश यादव भी मायावती और राहुल गांधी के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं। मायावती ने वोटबैंक के लिये तमाम वादे किये, लेकिन अपने शासनकाल में बुंदेलखंड को उपेक्षित रखा। वहीं राहुल गांधी आये और तमाम वादे किये, गरीब व दलित किसानों के घर खाना खाया, उनके घर रातें बितायीं और चले गये। परिणाम आज भी सिफर है। राहुल गांधी से इस बारे में सवाल करें, तो उनका एक ही जवाब होता है- मनरेगा। उनका तर्क है कि मनरेगा बुंदेलखंड की तस्वीर बदल सकता था, लेकिन राज्य सरकार ने साथ नहीं दिया। वहीं कई अन्य केंद्रीय योजनाओं के लिये भी वो राज्य सरकार को दोषी ठहरा देते हैं।












Click it and Unblock the Notifications