कूटनीति में भारत के आगे चारों खाने चित हुआ चीन
[नवीन निगम] सरकार भले ही घरेलू मोर्चे पर बुरी तरह विफल रही हो लेकिन चीन के खिलाफ उसकी रणनीति जमीन पर असर छोडऩे लगी है। अभी तक अपनी हेकड़ी दिखा रहा चीन अब भारत के इस नए पैतरे से चारों खाने चित है। अभी तक जापान से दोस्ती को लेकर भारत को आंख दिखा रहा चीन अब मानने लग गया है कि भारत बहुत संभलकर लेकिन बड़ी दूरदर्शिता के साथ चीन और जापान से अपने संबंधों को परिभाषित कर रहा हैं। एक तरफ जहां वह देख रहा है कि चीन उसके इस नए पैंतरे से परेशान है वहीं चीन की चुमार में उकसावे वाली रणनीति का वो हिस्सा बनने के लिए तैयार नहीं।
चीन चाहता है कि भारत को वह उत्तेजित करें और जापान और भारत की नई दोस्ती को वह दुनिया के सामने लाए। हम भारत सरकार को चीन के मामले में चाहे कितना कोसे लेकिन राजनीतिक चतुराई में भारत ने चीन को जबरदस्त मात दी हैं। आइये जानते है कि भारत ने पिछले कुछ महीनों में ऐसा क्या किया है जो चीन आज यह कहने को मजबूर हो गया है कि भारत, चीन और जापान के मतभेदों का फायदा उठा रहा हैं। भारत, चीन की घुसपैठ से हमेशा से परेशान रहा है। पहले भारत इन बातों को चुपचाप सह जाता था लेकिन जबसे भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना और भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता हुआ, भारत ने चीन का सीमा पर प्रतिरोध करने का फैसला लिया।
सीमा पर भारतीय तैयारियां
भारत ने पिछले दो-तीन साल में चीन की सीमा खासतौर पर लद्दाख और अक्साई चिन के पास अपने निगरानी दस्तों को मजबूत किया और चुमार तक सड़क बना डाली जिस पर नौ टन तक का भार ले जाया जा सकता है। चुमार में भारतीय सेना ऊंचाई पर है और चीन का वेस्टर्न हाईवे वहां सो साफ दिखाई पड़ता हैं। चीन हमेशा से पाक को भारत के खिलाफ खड़ा करता रहता है, लेकिन अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियान के बाद से पाक में अमेरिका की दखलदांजी बहुत बढ़ गई। ड्रोन हमले और लादेन को पाक में घुसकर मारने जैसे मामलों के बाद चीन को यकीन हो चला है कि पाक पर उसकी पकड़ से ज्यादा पकड़ अमेरिका की हैं। इसलिए वह पाक पर भी ज्यादा भरोसा नहीं कर सकता हैं।
और भी कारण देखें स्लाइडर में

ताजा घुसपैठ में भारत का शांत रहना
चीन ने इधर के कुछ महीनों में जो भी घुसपैठ की उसका पूरा मकसद भारत को उकसाना था लेकिन भारत ने हर घटना पर संयम रखकर चीन के इरादों पर पानी पेर दिया। पूरी दुनिया को भारत ने यह संदेश दिया कि चीन एक बड़े देश की जिम्मदारी निभाने में विफल है। जबकि भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र के रुप में उभरा।

घुसपैठ के बाद चीन को पीछे हटना पड़ा
लगभग तीन बार घुसपैठ से चीन को कोई फायदा नहीं हुआ हर बार उसे अंत में पीछे हटना पड़ा जो एक बड़े राष्ट्र के रुप में उसकी छवि पर दाग छोड़ गया। चीन भारत को बार-बार घुड़की में लेने की कोशिश करता रहा लेकिन भारत शांत खड़ा रहा। जिससे चीन को फायदे की जगह नुकसान हो गया।

जापान और व्यापार के कारण अब चीन झुकेगा
चीन को भारत की जमीन से ज्यादा चिंता भारत में अपने व्यापार को लेकर है, चीन, भारत में अपने व्यापार को हल्की सी भी आंच नहीं आने देना चाहता हैं। यदि भारत की जापान से दोस्ती बढ़ती है तो जापानी कंपनियां भारत में बुनियादी ढांचे में निवेश कर सकती है। क्योंकि बुनियादी ढांचे में भारत अभी भी चीन की कंपनियों को हाथ नहीं रखने देता। इसका जीता जागता उदाहरण है दिल्ली मेट्रो। जो जापान के सहयोग से बनाई गई है।

चीन की बयानबाजी बता रही है उसकी घबराहट
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में शंघाई सेन्टर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया और सेन्ट्रल एशिया स्टडीज के निदेशक वांग देहुआ ने कहा कि चीन को घेरने के लिए जापान, भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है जबकि भारत, चीन और जापान के बीच के सीमा विवाद का फायदा आर्थिक और प्रौद्योगिकी संबंधी लाभ लेने के लिए उठा रहा है। हालांकि चीन-भारत संबंध पर किसी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए उसे टोक्यो के साथ करीबी रक्षा संबंध विकसित करने में संयमित रहने को कहा गया था।

चीन के खिलाफ भारत तैयार
भारत चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पचास हजार और सैनिकों की तैनाती करेगा। चीन से बार बार होती घुसपैठ के मद्देनजर भारतीय सेना पिछले काफी वक्त से एक ऐसी सेना की मांग कर रही थी जो एलएसी के हालात के मद्देनजर लड़ाई के लिए तैयार रहे। लिहाजा एलएसी पर सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने एक कोर के गठन को हरी झंडी दिखा दी है। इस कोर में 65 हजार करोड़ रुपए के खर्च से चीन की सीमा पर 50 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जाएगी। जो यह दिखाती है कि भारत चीन से डरता नहीं है पर वह अभी संघर्ष नहीं चाहता है जब तक वह पूरी तैयारी न कर ले।

हमलावर कोर के गठन को मंजूरी
सरकार ने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए सेना की नई हमलावर कोर के गठन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सरकार ने इस कोर के गठन के लिए 64 हजार करोड़ रुपए के बजट को हरी झंडी दिखा दी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुआई में रक्षा मामलों से जुड़ी कैबिनेट समिति ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई। सेना की नई कोर का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में होगा। इस कोर के दो डिवीजन बिहार और असम में होंगे जबकि इसकी यूनिट जम्मू.कश्मीर के लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में तैनात की जाएगी। भारत की हर पहल बता रही है कि वह चीन से मुकाबले की पहल तब करेगा जब वह एलएसी पर ताकत को बराबरी पर ले आएंगा।
-
Iran Vs America War: अमेरिका ने किया सरेंडर! अचानक ईरान से युद्ध खत्म करने का किया ऐलान और फिर पलटे ट्रंप -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
Bengaluru Metro Pink Line: मेट्रो पिंक लाइन का शुरू हो रहा ट्रायल, जानें रूट और कब यात्री कर सकेंगे सवारी? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
15289 करोड़ रुपये में बिक गई राजस्थान रॉयल्स, कौन हैं खरीदने वाले काल सोमानी, IPL से पहले मचा तहलका












Click it and Unblock the Notifications