नरेंद्र मोदी की कीमत 5 रुपए लगाकर खुद बिक गई कांग्रेस

[नवीन निगम] अगले महीने की 11 तारीख को गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद में रैली को संबोधित करेंगे। इस रैली में प्रवेश शुल्‍क 5 रुपए लगाये जाने के बाद कांग्रेस ने मोदी की कीमत भी पांच रुपए लगा डाली। लेकिन उसे नहीं पता कि ऐसा करके कांग्रेस खुद बिक गई है। और इस वजह से उसे भारी नुकसान हो सकता है। अपने इस तर्क को सिद्ध करने के लिये मैं आपको पहले 70 के दशक में ले चलता हूं।

1977 में आई जनता पार्टी के तीन साल के अंदर ही सत्ता से बाहर हो जाने के क्या कारण थे लगता है कि कांग्रेस ने इस पर कभी विचार नहीं किया। जनता पार्टी की सरकार में कोई नेता कांग्रेस जितना भ्रष्ट नहीं था, सभी नेता आला दर्जे के वक्ता और ईमानदार थे लेकिन 1980 में तीन साल के अंदर ही जनता पार्टी का नामोनिशान मिट गया। इसका एकमात्र कारण था कि जनता की नाराजगी के कारण हटी इंदिरा गांधी के खिलाफ बदले की कार्रवाई के तहत जनता पार्टी के नेता लगातार पीछे पड़े रहे।

इंदिरा कुछ बोलती चाहे अच्छा हो या खराब, जनता पार्टी की सरकार उस पर प्रतिक्रिया जरुर देती। हरिशंकर परसाई ने अपने व्यंग (तीसरा कमीशन) में इसी बात पर कटाक्ष करते हुए जब कमीशन के सामने चरणसिंह को पेश किया तो उनके मुंह से कहलवाया कि उनका एकमात्र काम इंदिरा गांधी को जेल भेजना था। आज कांग्रेस जनता पार्टी की राह पर ही अग्रसर हैं। मोदी कुछ बोले अच्छा, खराब कांग्रेस उस पर प्रतिक्रिया जरुर देती है। मोदी चाल पर चाल चल रहे हैं। कांग्रेस फंसती जा रही हैं। क्या हो गया है कांग्रेस के नीति निर्धारकों को, सोचकर हैरत होती हैं।

गुजरात को पूरी तरह खोना चाहती है कांग्रेस

गुजरात को पूरी तरह खोना चाहती है कांग्रेस

आज मोदी कुछ भी बोलते है तो कांग्रेस ऐसे जवाब देती है जैसे गुजरात के लोग इस देश में रहते ही नहीं। अभी पुणे में मोदी ने कहा कि खेलो में भारत कुछ नहीं कर पा रहा, तो माकन आंकड़े पेश करते है कि गुजरात का कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय खेलों के 444 स्वर्ण में से कोई एक भी स्वर्ण क्यों नहीं जीत सका। कांगे्रस के इस तरह के कमेंट से गुजरात के लोगों को क्या लगेगा। क्या उन्हें बुरा नहीं लगेगा। मोदी गुजरात की तारीफ करते है तो कांग्रेस गुजरात के लोगों को भाजपा का कार्यकर्ता समझकर जवाब दे देती हैं। क्या गुजरात की 26 सीटों से कांग्रेस को कोई प्रेम नहीं रह गया।

क्षेत्रीय दल तो नहीं बोलते गुजरात के खिलाफ

क्षेत्रीय दल तो नहीं बोलते गुजरात के खिलाफ

यह काम मुलायम, नीतीश और मायावती करें तो एक बार सोचा भी जा सकता है कि उन्हें गुजरात के वोटर से कोई मतलब नहीं। लेकिन कांग्रेस तो गुजरात की अहम क्या सबसे बड़ी सियासी पार्टी हैं। वो क्या हमेशा के लिए गुजरात को खोने के लिए तैयार हैं।

बेहतर जवाब दे सकती थी कांग्रेस

बेहतर जवाब दे सकती थी कांग्रेस

इसी तरह मोदी की जनसभा पर पांच रुपए के टिकट का कांग्रेस बेहतर जवाब दे सकती थी कि यह सब नौटंकी है पैसा देकर मोदी को कोई नहीं सुनेगा, बाद में पीछे से कोई भाजपा व्यापारी पैसा दे देगा और फैलाया यह जाएगा कि टिकट खरीदकर लोगों ने जनसभा सुनी।

मनीष तिवारी का बेतुका बयान

मनीष तिवारी का बेतुका बयान

इसकी जगह कांग्रेस नेता और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने ट्विटर पर लिखा है बाबा प्रवचन का टिकट 100 से 1,00,000 रुपये। बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बावजूद सिनेमा का टिकट 200 से 500 रुपये और एक मुख्यमंत्री को सुनने के लिए टिकट 5 रुपये। बाजार ने दी है मोदी की असली कीमत। जनता को ऐसे जवाब से गुस्सा आता है। क्योंकि यह राशि एकत्र करने के नाम पर भले ही भाजपा नौटंकी कर रही हो लेकिन पैसा जाएगा तो एक बेहतर काम के लिए। इसकी आलोचना में कांग्रेस को सावधानी बरतनी चाहिए थी।

सेना में गुजराती क्यों नहीं जाते

सेना में गुजराती क्यों नहीं जाते

मोदी ने जब पुणे में कहा कि युवा सेना में नहीं जा रहे हैं तो उनका मतलब देश के प्रत्येक युवा से था, लेकिन कांग्रेस ने इसे गुजरात के युवाओं से जोड़ दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी बताए कि गुजरात से कितने युवा सेना में जा रहे हैं। क्या कांग्रेस को समझ में नहीं आ रहा कि इस तरह के आरोप से गुजरात का मतदाता क्या सोचेगा। क्या उसे कांग्रेस पर गुस्सा नहीं आएगा।

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