प्रधानमंत्री बनने की आडवाणी की उम्मीदें अभी भी कायम
नागपुर। कल भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच संघ मुख्यालय में बैठक हुई। जिसमें आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में चर्चा की गई। साथ ही आडवाणी को भरोसा दिलाया गया कि भले ही नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बना दिया गया हो, पर चुनाव में प्रत्येक नेता की भूमिका अहम होगी। सूत्रों के अनुसार संघ ने आडवाणी से कहा है कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला भी सर्वसम्मति से किया जायेगा।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में संघ प्रमुख ने आडवाणी की शिकायतें भी सुनी और सलाह दी है कि पार्टी नेता आपसी विवाद दरकिनार कर चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाएं। हालांकि एनडीए के विस्तार की आडवाणी की सलाह को भागवत ने ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों का पिछलग्गू बनने की जगह भाजपा अपनी सामर्थ्य से चुनाव लड़ेगी।

मोदी को पार्टी में आगे लाये जाने के अलावा आडवाणी की नाराजगी कई और कारणों से भी है। आडवाणी का मानना है कि पार्टी अटल मॉडल को छोड़कर, गुजरात मॉडल के साथ चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है, गुजरात मॉडल पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। इसके पहले अपने 'इस्तीफे प्रकरण' से आडवाणी की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि कुछ गिने चुने लोग पार्टी के बड़े फैसले कर ले रहे हैं और सामूहिक सहभागिता का चलन खत्म किया जा रहा है।












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