RTI से नहीं रही CPI, सवालों का दिया जबाव

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नयी दिल्ली। सूचना का अधिकार लाने वाली यूपीए सरकार खुद इसके दायरे में आने से डर गई है। राजनीतिक पार्टियों ने खुद को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने से मना कर दिया है। केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा एक आदेश के तहत राजनीतिक पार्टियों को सार्वजनिक प्राधिकार घोषित किए जाने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसी आरटीआई आवेदन का जवाब देने वाला पहला राजनीतिक दल बन गया है लेकिन उसने कहा है कि वह आरटीआई कानून के तहत नहीं आती।

जहां बाकी की राजनीतिक पार्टियां आरटीआई से डर गई वहीं सीपीआई ने हिम्मत दिखाई और आरटीआई के तहत दिए गए एक आवेदन के जवाब में कहा है कि वह आईटी प्राधिकारियों और निर्वाचन आयोग को नियमित आधार पर सूचनाएं देती है और इसी तरह से आय और आय के स्रोतों पर भी पारदर्शिता रखती है। सीपीआई ने इस आवेदन का भले ही जबाव दिया हो लेकिन उसने ये भी साफ किया कि उसने अब तक किसी सार्वजनिक सूचना अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है।

सीपीआई महासचिव सुधाकर रेड्डी ने कहा कहा कि हम आरटीआई के दायरे में नहीं है और ना ही हम अब तक सूचना कानून का हिस्सा नहीं हैं लेकिन पार्टी ने साफ किया कि वो लोगों के सवालों का जवाब देते रहे हैं। एक आरटीआई आवेदन के जबाव में पार्टी ने कहा कि हम किसी भी आवेदन के बाद आय-व्यय का ब्यौरा देने के लिए कट्बद्ध नहीं है, लेकिन हम अपने कामों में पार्दर्शिता रखना चाहते है।

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