यूपी के किसान अखिलेश को देंगे बिजली का झटका
लखनऊ। बिजली दरों में वृद्धि को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मुश्किलें यूं तो बढ़ती ही जा रही हैं, अब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर उसकी मुश्किलें बढ़ाने की ओर अग्रसर है। संगठन ने 21 जुलाई को प्रदेश में सभी जिला मुख्यालयों पर बढ़ी विद्युत दरों के खिलाफ आंदोलन करने का निर्णय लिया है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत व प्रदेश अध्यक्ष दीवान चंद्र चौधरी ने प्रदेश कार्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा असंवैधानिक तरीके से प्रदेश के लगभग 10 लाख किसानों व 44 लाख ग्रामीण जनता को बिजली दरों में 35 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि की है जो पूरी तरह से गलत है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा किसानों को 5 से 6 घंटे विधुत आपूर्ति की जा रही है, जबकि पूर्व वर्षो में 14-15 घंटे बिजली मिल रही थी। ऐसे में आपूर्ति घटाकर बिजली की दरों में बढ़ोतरी पूरी तरह गलत है। टिकैत ने कहा कि बिजली दर बढ़ाकर प्रदेश सरकार किसानों से लगभग 400 करोड़ ज्यादा राजस्व कमाना चाहती है जिसके मंसूबों को कामयाब होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चुनावी घोषणा-पत्र के अनुसार वादा निभाए और किसानों को मुफ्त बिजली दे। साथ ही लगाए गए 3.70 प्रतिशत सरचार्ज को तुरंत वापस ले।
टिकैत ने कहा कि लोहिया के आदर्शो पर चलने वाली और अपने आपको किसान हितैशी बताने वाली समाजवादी पार्टी सरकार के शासनकाल में किसानों की सबसे ज्यादा अनदेखी की जा रही है। सपा के घोषणापत्र में चुनाव से पूर्व किसानों को फ्री बिजली, पानी, किसानों के 50 हजार रुपये तक की ऋण माफी किसान आयोग का गठन, किसान हितैशी जैसी कृषि नीति जैसे लोक लुभावने वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए सोचना भी बंद कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि पूर्व की सरकार द्वारा आयोजित कराये जा रहे जिला स्तर पर किसान दिवस को भी बंद कर दिया है। टिकैत ने कहा कि भाकियू प्रदेश अध्यक्ष दीवान चंद्र चौधरी और मुख्यमंत्री से पूर्व में भाकियू प्रतिनिधिमंडल की दो बार वार्ता में किसानों के संबंध में कुछ मुद्दों पर हुई सहमति को भी लागू नहीं किया गया है। सरकार द्वारा हर वर्ग से किए गए वादों को पूरा किया जा रहा है, लेकिन सरकार किसानों के मुद्दों पर खामोश है। भाकियू जल्द ही लखनऊ में एक बड़ी किसान पंचायत के माध्यम से 'वादा निभाओ' आंदोलन की शुरुआत करेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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