मध्‍य प्रदेश में पुनर्जीवन को तरस रहीं नदियां

भोपाल। मध्य प्रदेश में मृतप्राय हो चुकीं 50 नदियों को पुनर्जीवित करने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। बीते दो वर्षो में एक भी नदी को पुनर्जीवित नहीं किया जा सका है। सरकार ने दो वर्ष पूर्व जलाभिषेक अभियान के जरिए नदियों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया था, तब 50 नदियों को इसके लिए चिह्न्ति किया गया था, मगर यह अभियान जमीनी तौर पर सफल नहीं हो पाया है। लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकीं नदियां अपने प्रवाह के लिए तरस रही हैं। सरकार ने इन्हें प्रवाहमान करने की कार्ययोजना बनाई और अभियान शुरू किया, मगर अभियान परवान नहीं चढ़ पाया है।

नदियां पुनर्जीवित नहीं होने की बात बीते दिनों पानी वाले बाबा राजेंद्र सिंह के साथ हुई प्रशासनिक अफसरों की बैठक में खुलकर सामने आई। राज्य के प्रवास पर आए सिंह से चर्चा के दौरान मुख्य सचिव आर. परशुराम, अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा के अलावा मौजूद अन्य अफसरों ने स्वीकारा कि दो साल पहले नदियों को पुनर्जीवित करने का अभियान सफल नहीं रहा। एक भी नदी को पुनर्जीवित नहीं किया जा सका है।

Betwa river

अफसरों ने बताया कि राज्य के 50 नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई गई थी, इसके लिए जलाभिषेक अभियान भी शुरू किया गया था, मगर बजट के अभाव में यह अभियान आगे नहीं बढ़ पाया। मुख्य सचिव परशुराम ने बैठक में भरोसा दिलाया कि जल्दी ही बजट का प्रबंध कर नदियों को पुनर्जीवित करने का अभियान तेज किया जाएगा।

राज्य में 100 से ज्यादा ऐसी नदियां हैं जो अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। तमाम सामाजिक संगठनों से लेकर सरकार तक चिंतित हैं, मगर यह चिंता मूर्त रूप नहीं ले पा रही है। सरकारी अमले ने नदी पुनर्जीवित करने का अभियान फिर चलाने का भरोसा दिलाया है, मगर इस पर भरोसा कम है, क्योंकि पहले चलाए गए अभियान का अनुभव अच्छा नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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