तबाही: केदारनाथ की बाढ़ में सतना के एक ही परिवार के 11 बहे
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से केदारनाथ तथा बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा पर गए एक परिवार के 11 लोग भारी बारिश के कारण केदारनाथ की एक नदी में अचानक पानी बढ़ जाने के कारण बह गए। परिवार का सिर्फ एक सदस्य बचा है।
मिली जानकारी के अनुसार सतना के नागौद के रहने वाले चंचल अग्रवाल का परिवार केदरानाथ-बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा पर था। मानसून की भारी बारिश के कारण 16 जून को अचानक नदियों में पानी आ जाने के कारण चंचल अग्रवाल के परिवार के 11 सदस्य बह गए, जिसमें छह बच्चे शामिल हैं।
चंचल अग्रवाल ने बुधवार को जोशी मठ से फोन करके अपने परिजनों को बताया कि वह भी दो दिन तक केदारनाथ में ही फंसे रहे, और बुधवार को वह हेलीकॉप्टर के जरिए जोशी मठ पहुंचे। चंचल ने बताया कि परविार के अन्य सभी 11 सदस्य नदी के बहाव में बह गए और अब तक किसी का भी पता नहीं चल सका है।
मालूम हो कि उत्तराखंड में अप्रत्याशित वर्षा और बादल फटने के बाद भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण अभी हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा से 100 से ज्यादा लोगों की जान गई है और 62,000 से अधिक तीर्थयात्री व पर्यटक फंसे हुए हैं। यह जानकारी अधिकारियों और आपदा में जीवित बचे लोगों ने दी है।भयंकर आपदा से आहत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने आईएएनएस को बताया, "यह एक ऐसी त्रासदी है जिसकी तीव्रता ने मुझे स्तब्ध कर दिया है।"
बहुगुणा ने कहा कि केदारनाथ के रास्ते में 18 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता ध्वस्त हो गया है और कम से कम एक वर्ष तक तीर्थयात्रा संभव नहीं है। केदारनाथ हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है।
बुधवार को मौसम साफ होने के बाद मौसम साफ होने के बाद तबाही का शिकार बने केदारनाथ कस्बे में फंसे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए सेना और अर्धसैनिक बल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर सकी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हेलीकाप्टर से विध्वंस का हवाई सर्वेक्षण किया। प्रधानमंत्री ने राज्य में आपदा राहत कार्यो के लिए 1000 करोड़ रुपये की सहायता दी है और कहा है कि मारे गए लोगों की संख्या वर्तमान आधिकारिक संख्या 102 से बढ़ सकती है।
राहत एवं बचाव कार्यो में शामिल एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि उन्हें इस बात का डर है कि उत्तराखंड में भारी वर्षा और अचानक आई बाढ़ में कई लोग मारे गए हो सकते हैं।
अधिकारी ने कहा, "हम पक्के तौर पर मारे गए लोगों की संख्या के बारे में कुछ नहीं कह सकते, लेकिन एक बात तो तय है कि संख्या वर्तमान संख्या से कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि 15000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि 10,000 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने कहा कि 62000 से ज्यादा तीर्थयात्री अभी भी फंसे हुए हैं।
केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह ने स्थिति की समीक्षा के लिए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का दौरा किया। राहत एवं बचाव के काम में भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, सेना और वायुसेना जुटी हुई है। रोप के सहारे फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है।
उफनाई मंदाकिनी में केदारनाथ के समीप जमीन का एक बड़ा हिस्सा बह गया है। अधिकारियों ने कहा कि 250 से ज्यादा सरकार और निजी होटल एवं लॉज एवं मंदिर के आसपास की 100 दुकानें खत्म हो चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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