आसमानी आफत से मारने वालों की संख्या 100 के पार, PM का हवाई दौरा
नयी दिल्ली। गंगा विकराल रुप धारण कर चुकी है। आसमानी आफत थमने का नाम नहीं ले रही है। चारों ओर तांडव मचा हुआ है। मरने वालों की तादात सैकड़ों से हजारों की ओर बढ़ती जा रही है। भारी बारिश और बाढ़ से अब तक देशभर में 131 लोगों के मारे जाने की खबर है।
बाढ़ और बारी बारिश से सबसे ज्यादा तबाही उत्तराखंड में मची है, जहां मरने वालों का आंकड़ा 102 के पार पहुंच गया है। केवल उत्तराखंड में 70 हजार से ज्यादा लोग ऐसे है जिनका कोई अता-पता नहीं है। जहां तक नजर जाती है पानी ही पानी।
बादल फटने के बाद जो तांडव मचा उसने सौकड़ों जाने छीन ली। बादल फटने के बाद वहां केलव मलबा ही रह गया है। चारों ओर कीचड़ फैला है। मलबे में लोग फंसे है। केदारनाथ तो दलदल बन गया है। उत्तराखंड में राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है। भारी तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हवाई सर्वेक्षण करने वाले हैं।
उत्तराखंड में सैलाब से मची तबाही दिल दहलाने वाली है। सैकड़ों लोग मर गए, जो लोग अपनी जान बचाने में कामयाब हो गए हैं, अब उन्हें अपनी सांसें बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। रुद्रप्रयाग , गंगोत्री, यमुनोत्री, ऋशिकेश, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ, बद्रीनाथ में सबसे ज्यादा तबाही मची है। सबसे ज्यादा बर्बादी केदारनाथ में मची है, बादल फटने के बाद केदारनाथ मंदिर भी आधा मलबे में समा गया है. पूरे इलाके में मलबा और पानी बिखरा हुआ है। लोगों के घर कीचड़ में दब गए है। अब
तक वहां से करीब पचास शव निकाले जा चुके हैं। पिछले 48 घंटों से लगातार केदारनाथ में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. सेना के जवान हेलीकॉप्टर से लोगों को बचाने में जुटे हुए है. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसरों का कहना है कि ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई. अब तक यहां से करीब 500 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।
वायुसेना ने ऑपरेशन 'राहत' शुरू कर दिया है। वायुसेना ने यमुनानगर, केदारनाथ-बद्रीनाथ क्षेत्र, रूद्रप्रयाग घाटी, करचम-पुह क्षेत्र में बचाव कार्य शुरू कर दिया है। सरसवा वायुसेना स्टेशन को इस अभियान के लिए केन्द्र बनाया गया है, जहां भटिंडा और हिंडन से हेलीकॉप्टर लाए गए हैं। हाल ही में शामिल एमआई-17 वी5 सहित मध्यम भार वहन करने वाले अनेक हेलीकॉप्टरों को 17 जून को खराब मौसम के बावजूद देहरादून के जॉलीग्रांट हैलीपैड पर तैनात किया गया।

केदारनाथ में तबाही
सबसे ज्यादा बर्बादी केदारनाथ में मची है, बादल फटने के बाद केदारनाथ मंदिर भी आधा मलबे में समा गया है. पूरे इलाके में मलबा और पानी बिखरा हुआ है।

शिव को लील गई गंगा
ऋशिकेश में गंगा में आए उफान के कारण शिव के गर्दन तक पानी पहुंच गया। चारों ओर पानी ही पानी भर चुका है।

राहत पहुंचा रही हैं सेना
बचाव के काम में आई तेजी लाने के लिए सेना के 5000 जवानों को उत्तराखंड भेजा गया है। बारिश के कुछ कम होते ही राहत व बचाव का काम तेज कर दिया गया है।

रहात की राह में रोड़े
राहत कार्य में मुश्किलें आ रही है क्यों कि सड़के तेज बहाव में बह चुकी है। चलने लायक रास्ता भी नहीं बचा है। बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक को बड़ी मुश्किल से सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है।

सीएम बहुगुणा ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बाढ़ से मची तबाही को अपने आंखों से देखा तो दंग रह गए। उन्होंने लोगों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

हालात बेहद मुश्किल
यकीनन उत्तराखंड में हालात मुश्किल भरे हैं। अभी हालात सामान्य होने में लंबा वक्त लगने वाला है।

जहां नजर डालिए, पानी ही पानी
हरिद्वार में भी गंगा उफान पर है। कई इलाके पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं। हरकी पौंड़ी के पास कार पार्किंग में अभी भी कई गाड़ियां पानी में डूबी हुई हैं। ट्रक पूरी तरह पानी में डूब गया है।

आशियाना हुआ तबाह
बाढ ने लोगों के आशियाने को अपने में समां लिया है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।

जहां नजर डालिए, पानी ही पानी
हरिद्वार में भी गंगा उफान पर है। कई इलाके पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं। हरकी पौंड़ी के पास कार पार्किंग में अभी भी कई गाड़ियां पानी में डूबी हुई हैं। ट्रक पूरी तरह पानी में डूब गया है।












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