पहाड़ पर तबाही, बचाव में लगे 5000 जवान
नयी दिल्ली। उत्तराखंड में कुदरत ने गजब का कहर ढाया है। मूसलाधार बारिश और फ्लैश फ्लड ने केदारनाथ धाम में भारी तबाही मचाई है। मौत का तांडव मचा है जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं।
सेना के सहायता केन्द्र हरसिल, रूद्रप्रयाग, जोशीमठ, यानागगरिया, गोवन्दि घाट तथा धारचुलां में सैकड़ों प्रभावित उन लोगों को आश्रय, खाना स्वच्छ पानी और चिकित्सा मुहैया करा रहे हैं जोकि मुसलाधार बारिश और उफनाती नदियों से जगह-जगह पर फंस गये हैं।
मंगलवार को क्विक रिएक्शन टीमों ने कई जगह पर चिकित्सा सहायता पोस्ट स्थापित किये हैं, और चार एम्बुलैन्स गाड़ियां भी आपदा में हुए घायलों को सहायता पहुंचा रही हैं।

सेना उत्तराखण्ड में बचाव और सहायता का कार्य चार सेक्टरों में कर रही है। हरशिल, केदारनाथ, जोशीमठ और धारचुला में सेना ने लकड़ी का एक अस्थाई पुल बनाकर 600 से ज्यादा व्यक्तियों को बचाया है। इन सभी व्यक्तियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।
सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो आफिसर 24 जवानों को गौरीकुंड के निकट तथा केदारनाथ से 17 किलोमीटर पहले हेलीकॉप्टर द्वारा बचाव कार्य के लिए उतारा गया है। तीर्थ यात्रियों को पैदल सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
जोशीमठ सेक्टर में एनएच 58 गोविन्द घाट के निकट बह चुका है। 2000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर जोशीमठ में आश्रय दिया गया है, जिनमें से 1100 लोग सेना द्वारा प्रबन्धित आश्रय में है। गोविन्द घाट में अलकनन्दा के ऊपर एक केबलब्रिज बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे हेमकुंड साहिब के तीर्थ यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके। तकरीबन 400 यात्रियों को अब तक सुरिक्षत निकाला जा सका है।
कालीनदी में बाढ़ से प्रभावित धारचुला के निचले इलाकों में सैकड़ों लोगों को ऊंचे इलाकों में सुरक्षित पहुंचा दिया गया है। सेना की टुकड़ियां बिजनौर से आठ किलोमीटर पश्चिम में राबड़ी गांव में फंसे हुए लोगों को निकालने की प्रक्रिया में है।
सेना के लोग सहारनपुर के शामली और दौलतपुर गांव में फंसे हुए लोगों की सहायता कर रहे हैं। सिविल प्रशासन ने पीलीभीत और मुजफ्फरनगर जिलों में बचाव कार्य के लिए सेना की सहायता मांगी है। सेना बार्डर रोड के जवानों ने ऋषिकेश, उत्तरकाशी रोड को धराश से 30 किमी. पहले तक खोल दिया है। हरशिल से 5 किमी. में धराली गांव से 200 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।
सेना ने सिविल प्रशासन की मदद करने के लिए एक समन्वित प्रयास किया है ताकि लोगों की सहायता की जा सके। खाना, पानी, गरम कपड़े के रूप में सेना के सभी को मानवीय तौर पर सहायता कर रही है। सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, सूर्या मेडिकल आकस्मिक हेल्पलाइन इस समय काफी कारगर साबित हुई है। पिछले 24 घंटों में 500 से ज्यादा काल आ चुकी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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