पहाड़ से लौटे पर्यटकों ने सुनाई डरावनी दास्तान

हरिद्वार/लखनऊ। भारी बारिश के बाद उफनाई नदियों के तांडव में फंसे और किसी तरह जान बचा कर लौटे आकाश और उसके तीन दोस्तों ने उत्तराखंड में हुई तबाही का आंखों देखा हाल बताया। उनकी कार नदी के तेज बहाव में फंस कर बह गई और वे असहाय रह गए।

हरिद्वार लौटने के बाद उन लोगों ने बताया कि एक निजी हेलीपैड पर शरण लेकर वे प्रकृति के कहर का शिकार होने से बच गए।

चारों मित्र महसूस करते हैं कि उन्हें नया जीवन मिला है। उत्तराखंड में 100 से ज्यादा जिंदगियों को लील लेने वाली विध्वंसकारी बाढ़ को देख कर एक समय तो उनलोगों ने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी।

उत्तराखंड में तबाही का सबसे ज्यादा शिकार हुए केदारनाथ की यात्रा पर लखनऊ से गए दल में शामिल एक अन्य जीवित बचे व्यक्ति ने बताया, "हमने घरों और होटलों को इस तरह ध्वस्त होते देखा जैसे वे कार्डबोर्ड के बने हों।"

पिछले सप्ताह भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटना के बाद मची तबाही के बाद अधिकारियों ने राहत और बचाव के काम में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सेना की भी मदद ली। वहां से बच कर लौटे हर किसी ने डरावनी दास्तान सुनाई।

लौटने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि किस तरह उनके दल से आगे चल रही एक लड़की अचानक पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गई। सोनप्रयाग के समीप 100 से ज्यादा लोग जिनमें अधिकांशत: तीर्थयात्री शामिल हैं, अभी तक फंसे हुए हैं।

शैलेंद्र प्रकाश सिंह नाम के एक यात्री ने बताया कि तबाही का आलम यह था कि उनके पास सिर्फ बदन पर कपड़े ही बचे हैं। इसके अलावा जो कुछ था वह सब जाता रहा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रामपति राम त्रिपाठी उत्तरकाशी स्थित गढ़वाल पर्यटन अतिथिगृह में फंसे हुए हैं। उन्हें वहां से निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने अपने पार्टी सहयोगियों को बताया कि गंगोत्री से लौटने के क्रम में वे 15 जून से ही फंसे पड़े हैं। उनके मुताबिक सभी प्रमुख सड़कें नक्शे से गायब हैं।

उन्होंने फोन पर शिकायत की है, "हमारी सहायता के लिए कोई भी नहीं आया है। न तो बिजली है न खाने के लिए कुछ है। हमें बस यहां ठहरने की जगह मिली हुई है।"

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि लखनऊ से 20 लोग और उत्तर प्रदेश से 30 परिवार उत्तराखंड में आई आफत में फंसे हुए हैं।

कुछ लोग सौभाग्यशाली रहे जिन्होंने मोबाइल फोन का नेटवर्क खत्म होने से पहले अपने परिवार को अपनी स्थिति की सूचना दे दी।

इस बीच उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को पुष्टि की कि तेज बहाव में बह गए दो पुलिसकर्मियों और आईटीबीपी के तीन जवानों के शव मिल गए हैं।

पुलिस महानिदेशक सत्यव्रत ने कहा कि पुलिस बल के कुछ और लोग मारे गए हो सकते हैं।

उन्होंने बताया, "रामबादा अस्थायी पुलिस चौकी में पदस्थापित पुलिसकर्मियों का अभी तक पता नहीं चल पा रहा है और हमें यह जानकारी नहीं कि उनके साथ क्या हुआ।" रामबादा केदारनाथ के मार्ग में अवस्थित है।

उत्तरकाशी और रूद्रप्रयास के लौटकर आने वाले लोगों की देखरेख में कई निजी कंपनियां और हरिद्वार के गायत्री परिवार जैसे सामाजिक संगठन जुटे हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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