तलाक के बाद नीतीश का इम्तिहान, विश्वासमत किया पेश
पटना। बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। एनडीए से अलगाव के बाद नीतीश को अपनी सरकार बचाने के लिए बहुमत साबित करना है। तय समयसीमा के मुताबिक नीतीश ने विधानसभा में विश्वास मत पेश किया है। बीजेपी से संबंध विक्षेद होने के बाद जेडी(यू) को विश्वास मत पेश करना था, जिसके लिए नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा की विशेष बैठक बुलाई है। बैठक 11 बजे से दो बजे दिन तक चलेगी।
दो तिहाई बहुमत पेश करने के बाद मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि विश्वास मत पेश करने की की नौबत क्यों आई है। नीतीश के प्रस्ताव के बाद सदन में वोटिंग होगी। प्रस्ताव पर दूसरे दलों के नेता भी पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रखेंगे। इसके बाद वोटिंग होगी। 243 सदस्यीय वाली बिहार विधानसभा में सरकार बचाने के लिए नीतीश कुमार को 122 सदस्यों का समर्थन चाहिए। जेडीयू के पास जेडी(यू) के पास अपने 118 विधायक हैं। विधानसभा में जेडीयू और बीजेपी के अलावा 4 निर्दलीय विधायकों है।

इसके अलावा माना जा रहा है कि नीतीस से दोस्ती का हात बढ़ा रही कांग्रेस अपने 4 विधायकों का समर्थन नीतीश को दे सकती है। ऐसे में नीतीश के लिए समर्थन हासिल औपचारिकता भर है। नीतीश से दोस्ती और बीजेपी से बदले की आग में जल रही कांग्रेस निश्चित ही जेडीयू का फायदा पहुंचाएंगी।
ऐसे में या तो उनके चारों विधायक विश्वास मत के दौरान नीतीश सरकार के खिलाफ वोट नहीं डालेंगे या फिर सदन से अनुपस्थित रहकर सरकार को फायदा पहुंचाएंगे। वहीं अगर नीतीश के विरोध की बात करे तो बिहार विधानसभा में बीजेपी के 91 विधायक है , जबकि नीतीश के घुर विरोधी और प्रमुख विपक्षी पार्टी आरजेडी के 22 विधायक है। इन दोनों के अलावा दो निर्दलीय भी नीतीश के खिलाफ वोटिंग कर सकते है। इस आंकड़ों को देखे तो नीतीश को कहीं से भी खतरा नहीं है। उनकी सरकार बनी रहेंगे, लेकिन अगले चुनाव में वोटिंग के परिणाम पर फर्क तो जरुर पड़ेंगा।












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