आडवाणी पर राजनाथ ने नहीं दिया सीधा जवाब
नई दिल्ली। वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के पार्टी पदों से इस्तीफा देने के बाद पार्टी नेताओं की उन्हें मनाने की जद्दोजहद जारी है। आज जब राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपने घर से निकले तो उनसे पत्रकारों ने इस संबंध में सवाल किये तो उन्होने इस बारे में सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होने हालांकि संघ के बारे में सफाई दी और कहा कि आडवाणी की नाराजगी के संबंध में संघ ने कोई बयान नहीं दिया है।
यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ समय पहले अनाधिकारिक तौर पर संघ का बयान आया था कि आडवाणी को नरेंद्र मोदी की कीमत पर न मनाया जाय। इससे यह साफ है कि भाजपा, गोवा बैठक में लिये गये फैसले से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। इस संबंध में संघ प्रमुख ने भी कहा था कि पार्टी को जो नुकसान होना था वह अब हो चुका है, अत: अब आगे की तरफ देखा जाय। बताया जा रहा है कि मोदी को भाजपा में फ्रंटफुट पर लाये जाने का काम छह महीने पहले ही शुरू हो गया था।

वहीं खुद नरेंद्र मोदी ने बताया कि मैंने आडवाणी जी से फोन पर बात की और उनसे अपना निर्णय बदलने का आग्रह किया। मोदी ने आडवाणी से यह भी कहा कि अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ करें, साथ ही मोदी ने उम्मीद जतायी कि मैं समझता हूं कि आडवाणी लाखों कार्यकर्ताओं को निराश नहीं करेंगे। आडवाणी को यह पहले से ही यकीन था कि मोदी को भाजपा में लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, इसीलिए हर मौके पर उन्होने मोदी का विरोध किया।
इस संबंध में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आडवाणी ने पार्टी से इस्तीफा देकर खुद ही अपना महत्व खत्म कर लिया है, क्योंकि अब उनका कोई जनाधार नहीं बचा है, जबकि देश के युवा और कार्यकर्ता मोदी को प्रचार समिति का चेयरमैन बनाये जाने से उत्साहित हैं। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता शत्रुघ्न सिंहा ने कहा है कि अब वही लोग आडवाणी के इस्तीफे पर आंसू बहा रहे हैं जिन्होने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया। उन्होने कई और पार्टी पदाधिकारियों द्वारा इस्तीफा देने की भी धमकी दी।
इस पूरे घटनाक्रम में अब यह तो तय हो ही चुका है कि भाजपा मोदी की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगी और 2014 लोकसभा चुनाव मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जायेगा।












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