कई मतलब है मुलायम की बात के?

शायद यह संदेश उन नौकरशाहों के लिए था जो मुलायम के करीबी है और अखिलेश की बात नहीं मानते है। क्योंकि उन्होंने जब यह कहा कि जो नौकरशाह बात न माने तो उसे जेल में डाल दो, संविधान इसकी इजाजत देता है।
या तो यह संदेश परिवार के उन लोगों के लिए था जो अखिलेश की राह में रोडे डालते रहते है। सपा के एक नेता जो अच्छे विश्लेषक भी है कहते हैं कि सरकार में इस समय दो तरह के तत्व है एक जो पार्टी और मुलायम से अपने करीब होने का डंका पीटते रहते है और सरकारी अधिकारियों की कोई बात नहीं मानते है। इनमें नौकरशाह और पार्टी के नेताओं की एक लम्बी जमात है और यही जमात अखिलेश को काम नहीं करने दे रही है। नेताजी शायद इन लोगों के खिलाफ ही सख्त कदम उठाने की बात कह रहे है। यही वो जमात है जो समय-समय पर अखिलेश सरकार की नेताजी के पास जाकर आलोचना करने में लगी रहती है।
मुलायम सिंह यादव के कथन को दूसरा आशय यह हो सकता है कि वह लोकसभा चुनाव के बाद यदि केंद्र में सत्ता हाथ नहीं आती है और चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है तो वह पंजाब में बादल वाला फार्मूला अजमा सकते है जो उनके जहन में पहले भी था, यानी सीएम वो रहेंगे और डिप्टी सीएम अखिलेश यादव। पंजाब में अकाली दल का यह फार्मूला कामयाब रहा है और दूसरी बार लगातार सत्ता में आया है। जबकि वहां गठबंधन सरकार है।
बादल सीएम है लेकिन सारे काम उनके बेटे और डिप्टी सीएम सुखविंदर सिंह बादल करते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि प्रशासन का काम सुखविंदर देखते है और राजनीति का काम खासतौर पर भाजपा से संबंध, का काम बादल खुद देखते है और ऐसा करके उन्होंने अपने बेटे को वो सब कुछ सिखा दिया है जो वह जानते थे। अखिलेश यादव की समस्या को इसी बात से समझा जा सकता है, जब कुछ दिन पहले एक अखबार को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वह कबूल करते है कि उप्र में कई पॉवर सेंटर हैं। उन्होंने कहा कि सपा में कई वरिष्ठ लोग हैं जिनकी बात पर वह ध्यान देते हैं लेकिन अंतिम निर्णय उनका ही होता है। अखिलेश यादव का यह कबूलना कि कई पावर सेंटर है, यह बताने के लिए काफी है कि वह सीएम होते हुए भी किन मुश्किलों का सामना कर रहेहैं।
वह खुलकर काम करना चाहते है क्योंकि वो जानते है कि सीएम के रूप में उनका कार्यकाल उनका भविष्य तय करेंगा। अगर मुलायम सिंह यादव के इस बयान का सहारा लेकर अखिलेश पार्टी और मुलायम के करीबी नौकरशाहों और नेताओं पर सख्ती करते है तो इन नौकरशाहों और पार्टी नेताओं के लिए यह संदेश साफ है कि सुधर जाओं और यदि ऐसा नहीं होता है तो इसका अर्थ लोकसभा के बाद पंजाब में बादल वाला फार्मूला ही हो सकता है।












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