डीएसपी हत्‍याकांड: सजा तो काट ही चुके है राजा भैया

[नवीन निगम] उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाले प्रतापगढ़ के बलीपुर हत्याकांड के एक मामले में सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया है। बलीपुर के ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या में पांच लोगों के खिलाफ दाखिल तीस पन्नों के आरोप पत्र में कहीं भी पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैय्या का जिक्र नहीं है। ग्राम प्रधान और जिस दिन डीएसपी की हत्या हुई थी मैंने उसी दिन लिख दिया था कि एफआईआर में राजा भैय्या का नाम जानबूझकर उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत डाला गया है।

बाद में यह भी साबित हो गया कि एफआईआर डीएसपी की पत्नी ने नहीं किसी और ने लिखवाई थी, अब जबकि सीबीआई ने ग्राम प्रधान के मामले में राजा भैय्या का नाम नहीं लिया है तब सीबीआई को इस कोण से भी जांच करनी चाहिए कि कहीं राजा भैय्या को हटवाने के लिए ही तो नहीं यह सारा खेल रचा गया। क्योंकि सीबीआई राजा भैय्या को आरोपी बनाए या न बनाए वह जनता की अदालत में तो सजा पा ही गए। मंत्री पद गया, सपा से दूरी बढ़ी।

Raja Bhaiya

अब आगे मंत्री बनाए जाने की भी आशा नहीं है और दूसरे दलों की तरफ भी नहीं जा सकते क्योंकि अभी चार साल तक सपा की सरकार है और उसके बाद भी या तो सपा आएंगी या बसपा। इसलिए राजा भैय्या को अब खामोश होकर मौके का इंतजार करना पड़ेगा हां उनकी उदासीनता से यदि सपा लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ के आसपास की सीटें हार गई तो उन्हें सपा में फिर से सम्मान मिल सकता हैं।

इस बीच सीबीआई गवाहों की सुरक्षा को लेकर जरूर सतर्क है और अदालत से इस बात के लिए अनुरोध किया है कि उनकी पहचान छुपायी जाए। नन्हें यादव के परिवार के आरोपों के आधार पर राजा भैया सवालों के घेरे में थे। शुरुआती दौर में सीबीआइ ने उनसे कोई पूछताछ भी नहीं की। हाल में दो दिनों तक लगातार उनसे लम्बी पूछताछ चली। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को न तो राजा भैय्या के खिलाफ कोई साक्ष्य मिला और न ही पूछताछ में कोई ऐसा तथ्य निकला, जिससे उनकी घेरेबंदी हो। अब ऐसी स्थिति में सीबीआई के पास कोई चारा नहीं कि वह राजा भैय्या को हर मामले में क्लीन चिट देती जाए। लेकिन कुंडा के इस बाहुबली का जो नुकसान मायावती अपने शासनकाल में नहीं कर पाई वो नुकसान उनकीअपनी पार्टी सपा के शासनकाल में हो गया।

उल्लेखनीय है कि दो मार्च को प्रतापगढ़ के बलीपुर में प्रधान नन्हें यादव की हत्या कर दी गयी। इसके बाद मौके पर पहुंचे सीओ कुंडा जियाउल हक को भी मार डाला गया। इस दौरान छीना झपटी में बंदूक की गोली चलने से नन्हें के भाई सुरेश यादव की भी मौत हो गयी। इस घटना में अखिलेश सरकार के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैय्या पर आरोप लगे और सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने उनके खिलाफ हत्या के षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद सूबे की सियासत गर्मा गयी और राजा भैया को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। कुछ दिनों बाद राजा भैया के खिलाफ नन्हें यादव का परिवार मुखर हो गया और उनके ऊपर तमाम आरोप जड़े।

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