नक्सलियों को भारी पड़ेंगे कर्मा पर चाकुओं के 78 वार

[नवीन निगम] नक्सलियों ने बीते शनिवार को कांग्रेस नेता व सलवा जुडूम के संस्‍थापक महेंद्र कर्मा को बेरहमी से मार डाला। उनके शरीर पर चाकुओं से करीब 78 वार किये गये। उसके बाद मौत का तांडव और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को धमकी। नक्‍सलियों का यह दुस्साहस अब उनके लिए भारी पडऩे वाला है। क्योंकि नक्सली आजतक सरकार की किसी सर्वमान्य नीति न होने की वजह से सरकार के खिलाफ अभियान में सफल होते रहते थे, जिन राज्यों में नक्सली फैले हुए हैं उनमें भाजपा या कांग्रेस की ही सरकारें हैं।

एक साथ दोनो की तरफ बंदूक तान देने से नक्सली अब दोनों के निशाने पर आ गए हैं। नहीं तो नक्सल प्रभावित राज्य में जिस पार्टी की सरकार होती थी वो यह सोचकर ही हम इन्हें आगे बढ़कर गले लगाने की कोशिश करें तो यह हमेशा हमारी पार्टी के वोट बैंक बन जाएंगे कि वजह से राज्य सरकारें हमेशा केंद्र सरकार के कठोर नीतियों को कारगर ढग़ से लागू नहीं होने देती थी।

अभी जो खबर सूत्रों के हवाले से बाहर आ रही है वो यह है कि सरकार दो साल पहले बनी नरेश चंद्रा समिति की सिफारिशों पर विचार करने जा रही है। समिति ने सरकार को माओवादियों से परोक्ष वार्ता के रास्ते खोलने से लेकर प्रभावित इलाकों में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने तक कई सिफारिशें की हैं। करीब एक साल के गहन अध्ययन व विभिन्न विभागों से विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई सिफारिशों पर सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया था लेकिन अब सरकार इस समिति की सिफारिशों पर ध्यान दे रही है।

क्‍या हैं समिति की सिफारिशें-

सेना उतारने का विरोध

सेना उतारने का विरोध

समिति ने नक्सलियों से मुकाबले के लिए सीधे सेना को उतारने का तो विरोध किया है, लेकिन नक्सली इलाकों में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर फौजी मौजूदगी बढ़ाने को जरूरी बताया हैं।

जम्‍मू-कश्‍मीर में लगा था कैम्‍प सेना के प्रशिक्षण कैंप

जम्‍मू-कश्‍मीर में लगा था कैम्‍प सेना के प्रशिक्षण कैंप

रिपोर्ट के मुताबिक नक्सली इलाकों में प्रशिक्षण के बहाने सेना की मौजूदगी स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाएगी। सेना की चिकित्सा कैंप जैसी सुविधाएं कारगर साबित होंगी।

जम्‍मू-कश्‍मीर में लगा था कैम्‍प

जम्‍मू-कश्‍मीर में लगा था कैम्‍प

जम्मू-कश्मीर में भी सेना ने आतंक को दबाने के लिए पहले प्रशिक्षण शिविर ही खोले थे जो बहुत कारगर साबित हुए।

जनजातीय इलाकों में जन-अदालतें

जनजातीय इलाकों में जन-अदालतें

जनजातीय इलाकों में नक्सली जन-अदालतों की पैठ तोडऩे के लिए न्याय तंत्र में सुधार की भी सिफारिश की गई हैं। इसके मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में मोबाइल व फास्ट ट्रैक अदालतों की सुविधा की जरूरत है।

थानों का आधुनिकीकरण

थानों का आधुनिकीकरण

समिति ने खुफिया तंत्र में सुधार और पुलिस थानों के आधुनिकीकरण के भी कई उपाय सुझाए हैं। समिति की सिफारिशों में नक्सलियों से सीधे बातचीत की पैरवी तो नहीं की गई है, लेकिन खुफिया एजेंसियों के सहारे पर्दे के पीछे नक्सली नेतृत्व से चर्चा की संभावनाएं तलाशने की वकालत की गई हैं।

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