माया ने चली सपा के खिलाफ शतरंजी चाल
लखनऊ (नवीन निगम)। लोकसभा के चुनाव भले ही अभी दूर हो लेकिन यूपी में चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है। इस समय यहां की प्रमुख दो पार्टियों सपा और बसपा के बीच जिन दो वोट बैंक पर कब्जा करने की होड़ दिखाई पड़ रही है वो हैं मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक। यूपी में अभी तक माना जा रहा था कि सपा का मुस्लिम वोट बैंक पर लगभग कब्जा है, लेकिन प्रदेश में हुए दंगे, प्रतापगढ़ में हुई मुस्लिम डीएसपी की हत्या, बुखारी का सपा के खिलाफ जहर उगलना और पिछले दिनों अखिलेश के हाथों एक मुस्लिम धर्मगुरू द्वारा सम्मान न ग्रहण करने के बाद बसपा को लगा कि यदि वह कोशिश करे तो अगले चुनावों तक कुछ मुस्लिम वोट उसकी झोली में भी आ सकते है।
कौन नहीं जानता कि लोकसभा में वंदे मातरम का गीत गाने की परपम्परा रही है और उसे राष्ट्रीय गीत माना जाता है। बसपा को पता है कि वंदे मातरम को लेकर मुस्लिम समुदाय समय-समय पर अपनी आवाज उठाता रहा है और वाजिब कारणों के तहत इसका विरोध करता रहा है। लोकसभा में बुधवार को वंदे मातरम के अपमान मामले पर बसपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने जो बहाना दिया है उसके बाद विवाद खड़ा होना ही था। बसपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ है, इसलिए वह लोकसभा छोड़कर चले गए थे।
बीएसपी सांसद यहां पर नहीं रुके उन्होंने कहा कि यह हमारे धर्म के खिलाफ है, इसलिए अगर भविष्य में भी ऐसी स्थिति आई तो मैं वही करूंगा, जो आज किया है। जहां तक देश की आन-बान की बात है तो मैं इसके लिए अपनी जान भी कुर्बान करने को तैयार हूं। शफीकुर्रहमान बर्क वैसे भी बसपा के मुस्लिम राजनीति का सबसे मुख्य चेहरा है।अब इस बात पर उनके बयान को लेकर यूपी के मुसलमानों में प्रतिक्रिया जरुर होगी। सपा ने कुछ नहीं कहा तो वह मुस्लिम वोट बैंक से दूर हो सकती है।
यदि बर्क के बयान का पक्ष लिया तो उसका परशुराम जयंती के बहाने ब्राह्मणों को पटाने का अभियान फीका पड़ जाएगा और उसके परम्परागत यादव और पिछड़ों में भी कड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है। सपा को लोकसभा के चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक के साथ-साथ इस बार ब्राह्मणों का वोट बेंक भी चाहिए। इसलिए उसे इस मुद्दे पर बहुत संभलकर बयान देना होगा क्योंकि उसके लिए यह मामला एक तरफ कुंआ और दूसरी तरफ खाई के समान है। उधर बसपा ब्राह्मणों को लुभाने के लिए सतीश चंद्र मिश्र को अभियान पर लगाए हुए है। इसलिए बर्क द्वारा दिया गया बयान राजनीति से प्रेरित है और यह सपा के मुस्लिम वोट बैंक में बसपा की सेंध लगाने की एक चाल है।













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