पाकिस्तान की जेल में कैद हैं बांदा के 3 श्रमिक

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के तिंदवारी क्षेत्र के बेंदा गांव के मजरा देवपुर निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने आईएएनएस को बताया, छोटा भाई सुरेन्द्र सिंह अपने दो साथियों- लक्ष्मी पुत्र कल्लू व जगदीश उर्फ जुगनू के साथ पांच माह पूर्व काम की तलाश में गुजरात गया था। वहां पोरबंदर के एक मछली ठेकेदार के यहां मछली पकड़ने का काम मिला। तीनों एक दिन अनजाने में समुद्र में मछली पकड़ते हुए पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए, जहां पाक नौसैनिकों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
वे करांची शहर की लांदी जेल में चार माह से कैद हैं। कृष्ण मोहन ने बताया, पाकिस्तान सरकार ने उनकी गिरफ्तारी की सूचना अब तक नहीं दी है, अलबत्ता एक पखवारा पूर्व मछली ठेकेदार ने फोन पर सूचना दी है। जुगनू के भाई नत्थू का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वे लोग अपनी व्यथा सुनाने दिल्ली या लखनऊ तक जाने की स्थिति में नहीं हैं, फिर पाकिस्तान जाकर अपने भाई से कैसे मिल सकते हैं?
नत्थू ने कहा कि पाकिस्तान की जेल में सरबजीत के मारे जाने की खबर मिलने के बाद से वे अपने भाई की सलामती के लिए सिर्फ दुआएं कर रहे हैं। इसके पहले भी इसी इलाके के कल्याणपुर (जसईपुर) निवासी पांच श्रमिकों -संतोष कोरी, छोटेलाल कोरी, राजू कोरी, कल्लू व राकेश- ने पाकिस्तान की इसी जेल में 40 माह गुजारा था और उसके बाद 14 अगस्त, 2008 को उन्हें रिहा किया गया था। ये पांचों भी मछली पकड़ते हुए सीमा लांघ गए थे और गिरफ्तार कर लिए गए थे।
इनमें से एक श्रमिक संतोष कोरी ने बताया, पाक जेल में भारतीय कैदियों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है। खाने में दो सूखी रोटी मिलती है और जरा-सी गलती पर जमकर पिटाई की जाती है। चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सुग्रीव गिरि से इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "पीड़ित परिवार के लोगों को केन्द्र सरकार से संपर्क करना चाहिए। मैं इसमें कोई मदद नहीं कर सकता। बांदा के पुलिस अधीक्षक उदय शंकर जायसवाल से फोन पर संपर्क करने पर हालांकि उन्होंने कहा, "मैं इस समय बाहर हूं, बांदा वापस आने पर कैदियों के परिजनों से मिलूंगा और उनकी रिहाई के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय को लिखूंगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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