घोड़े पर बैठ कर आई दुल्हन, दुल्हे से पूछा मुझसे शादी करोगे

आपको बता दें कि यह किसी बदलाव की सोंच के साथ नहीं किया गया बल्कि एक परंपरा के तहत किया गया। इसे 'कन्या धात्री' नाम दिया गया है। कहा जाता है कि पटीदार समुदाय में यह परंपरा काफी पहले से ही थी लेकिन समय के साथ लोग इसे भूलते गये। रजनी का कहना है कि जब मुझसे समुदाय के बुजुर्गों ने ऐसा करने के लिए कहा, जिससे यह परंपरा फिर से जीवित हो सके, तो मुझे ये अच्छा नहीं लगा, लेकिन फिर मुझे लगा कि यह एक ऐसा विचार है जिसमें स्त्री पुरूष की बराबरी दिखती है अत: मैं तैयार हो गयी।
इस पर रजनी के पति 30 वर्षीय प्रवीण पटीदार जो कि राज्य सरकार में कर्मचारी हैं, का कहना है कि जब मुझे पता चला कि रजनी घोड़े पर सवार होकर मुझसे शादी करने आएगी तो वाकई ये मेरे लिए गर्व की बात थी। वहीं लड़के के पिता ईश्वरलाल पटेल का कहना है कि हमने एक महीने पहले शादी के कार्ड छपवाये थे जिस पर महिला सशक्तिकरण से जुड़ी बातें लिखी हुई थी। हम भी यही चाहते थे कि हमारी बहू बारात लेकर हमारे घर आये।
ईश्वरलाल ने बताया कि अपने घर पर सभी परंपराओं को निभाने के बाद बहू घोड़े पर सवार हुई। बारात गांव की पतली गलियों से निकलकर दूल्हे के घर पहुंची। जहां पर पहले से ही मौजूद लोगों ने वर पक्ष के लोगों ने उसका स्वागत किया। जिसके बाद शादी की सारी परंपराएं पूरी हुई।












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