अखिलेश जी! अपने बदजुबान मंत्रियों पर जरा लगाम लगाईए: भाजपा

विधायक कहते हुए नजर आये कि अधिकारियों से चप्पल लेकर बात करनी पड़ेगी। क्या हो रहा है, कानून का राज है या अराजक। श्री पाठक ने कहा कि अपनी विफलताओं का ठीकरा विपक्ष और मीडिया पर थोपने वाले अखिलेश राज में पुलिस आम जन के खौफ का कारण बन चुकी है। प्रदेश के थाने पुलिसिंग नही कलेक्शन के लिए काम कर रहे है। खुद मुख्यमंत्री विधानसभा में यह स्वीकार कर चुके है कि लोगों को थाने में जाने से डर लगता है। वरिष्ठ काबीना मंत्री आजम खां कह चुके है कि मुसीबत से घिरा व्यक्ति पुलिस को देख कर बचता है। जब पता है कि पुलिस आमजन के लिए काम नही कर पा रही है तो उसे ठीक करने के कौन से उपाय हो रहे है।
प्रदेश पुलिस पर बसपाइ कैडर की तरह काम करने की तोहमत मढ़ने वाले मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालने के एक साल बाद भी पूरे पुलिस तंत्र की ओवर हालिंग क्यों नही की? उन्होने कहा कि वास्तव में अखिलेश सरकार समाजवादी पार्टी के राजनैतिक एजेन्डे को पूरा करने में पुलिस तंत्र का प्रयोग करना चाहती है इसीलिए उसने पूरे पुलिस महकमें को मनमानी करने की छूट दे सफाई पलटन के रूप में प्रयोग करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में राज्य की कानून व्यवस्था बदतर हो रही है।
प्रदेश मे बढ़ते अपराध और हर दूसरे घण्टे हो रही दुराचार की घटनाओं को रोक पाने में विफल सरकार बयानबाजी कर अन्य प्रदेशो के मुकाबले कानून व्यवस्था ठीक होने का थोथा दावा कर रही है। बढ़ते अपराध और दुराचार की घटनाएं शर्मशार कर रही है। राजधानी लखनऊ हो या प्रदेश का कोई हिस्सा अछूता नही है। सरकारी तंत्र इन घटनाओं पर त्वरित और कठोर कार्यवाही के बजाये इन्हें छुपाने और मीडिया पर दुष्प्रचार की तोहमत लगा रहा है। प्रदेश प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री से कहा कि अर्नगल बयानबाजी कर रहे अपने नेताओं पर रोक लगाये।












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