जर्मन बेकरी ब्लास्ट मामले में हिमायत बेग को मौत की सजा

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पुणे। जर्मन बेकरी ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी हिमायत बेग को फांसी की सजा सुनाई है। 2010 में पूणे के जर्मन बेकरी ब्लास्ट में पांच विदेशी नागरिक समेत 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट मामले में कुल 6 आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिनमें से 5 लोग अभी भी फरार है। जबकि छठे आरोपी हिमायत बेग पूणे सेशन कोर्ट ने आज धमाके के आरोपी ठहराते हुए उसे मौत की सजा सुनाई है।

सेशन कोर्ट के न्यायाधीश एन पी धोटे ने फैसला सुनाते हुए बेग को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने बेग को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 435, 474 (जालसाजी), 153 (ए) (धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, भाषा के आधार पर विभिन्न वर्गों में वैमनस्य फैलाना और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम देना) तथा 120 (बी) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया गया है। उसे गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून और विस्फोटक पदार्थ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया गया है।

सुनवाई को दौरान कोर्ट ने अभियोजन की दलील को स्वीकार करते हुए माना कि हमले को ऐसी जगह किया गया जहां ज्यादा से ज्यादा विदेशी नागरिकों को नुकसान पहुंच सकता था। हमला का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित सरकार के प्रति आम लोगों के भरोसे का डिगाना था। साथ ही विदेशी नागरिक सुरक्षा के मामले में भारत की छवि खराब हो सके। बेग के अलावा जो पांच आरोपी इस मामले में फरार है। इस मामले में पांच फरार आरोपी यासिन भटकल, मोहसिन चौधरी, रियाज भटकल, फैयाज कागजी और इकबाल भटकल हैं।

मामले की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस ने बेग को 7 सितंबर 2010 को गिरफ्तार किया था। बेग पर विस्फोटक खरीदने और पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण लेने के इच्छुक मुस्लिम युवकों की यात्रा के लिए पैसे दिए जाने का भी आरोप है। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 103 गवाहों की जांच की। वहीं फांसी की सजा मिलने के बाद बेग के वकील अब्दुल रहमान ने कहा कि वह फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि बेग के साथ न्याय नहीं किया गया है, क्योंकि विस्फोट के समय न तो वह पुणे में था और न ही वह बम रखने के लिए जर्मन बेकरी गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले के मुख्य षड्यंत्रकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और अबू जंदल को भी अदालत नहीं लाया गया, जिसका नाम आरोप पत्र में है।

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