2017 तक नवीनीकरण ऊर्जा की क्षमता दोगुनी करेगा भारत: मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री ने कहा कि नवीन ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा इनका परंपरागत ऊर्जा के मुकाबले अधिक खर्चीला होना है, लेकिन इनकी कीमत कम होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए, सौर ऊर्जा की कीमत पिछले दो साल में घटकर आधी हो गई है, हालांकि आज भी इसकी कीमत जीवाश्म ईंधन पर आधारित बिजली के मुकाबले अधिक है। यदि कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव कम करने के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर होने वाले खर्च को भी इसमें जोड़ लिया जाए तो यह अधिक खर्चीला है।
इस क्षेत्र में कीमतों में कमी की संभावना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, हमने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक फोटोवोल्टाइक तथा सौर थर्मल सहित 22,000 मेगावाट की सौर क्षमता का विकास करना है। उन्होंने कहा, कीमतों में अंतर को विभिन्न तरह की सब्सिडी से कम करने का प्रयास किया जा रहा है। करीब 1,500 मेगावाट की सौर क्षमता देश में पहले ही स्थापित की जा चुकी है और 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत में वर्ष 2017 के आखिर तक अतिरिक्त 10,000 मेगावाट का क्रियान्वयन किया जाएगा। (आईएएनएस)












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