शिवराज के जंगलों में अब दहाडेंगे मोदी के शेर
नयी दिल्ली। नीतीश कुमार के इंकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तगड़ा झटका दिया है। मोदी सरकार के विरोध को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज आदेश दिया कि गीर नेशनल पार्क के शेरों को मध्य प्रदेश भेजा जाएगा। कोर्ट ने शेरों को गुजरात से बाहर भेजने का विरोध करने के लिए मोदी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लुप्त होते जानवरों का संरक्षण, किसी की निजी प्रतिष्ठा से ज्यादा ज़रूरी है।
कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात से मध्य प्रदेश में एशियाई लॉयन के स्थानंतरण को हरी झंडी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छह महीने के अंदर गीर के चुनिंदा शेरों को मध्य प्रदेश भेजा जाए। एक एक्सपर्ट कमेटी तय करेगी कि कितने शेरों को वहां भेजा जाएगा। चूंकि दोनों ही राज्य बीजेपी शासित राज्य है। लेकिन इस मसले पर काफी समय से विवाद चल रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात गीर के शेर अब मध्य प्रदेश के पालपुर कूनो नेशनल पार्क में भी दहाड़ेंगे। मध्य प्रदेश सरकार चाहती थी गुजरात में गिर के कुछ शेर कुनो पालपुर सेंचुरी में लाए जाएं। इस अभ्यारण के लिए राज्य सरकार पहले ही करोड़ो रुपए खर्च कर चुकी थी, लेकिन मोदी ये नहीं चाहते थे। गुजरात सरकार का मानना था कि शेर गुजरात की एक पहचान है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में शेर सुरक्षित नहीं रहेंगे। कोर्ट का ये फैसला मध्य प्रदेश में शेरों की घटती तादाद के मद्देनज़र किया गया है।
उम्मीद की जा रही है कि मध्य प्रदेश के जंगलों में ये शेर अपनी आबादी बढ़ाएंगे। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना था कि गिर में बाघों की संख्या 300 हो चुकी है इससे उनके आहार की भी कमी पड़ेगी और उनकी कोई बिमारी शेरों को भी जल्दी लग सकती है जिसके कारण सभी शेरों के खात्मे का खतरा है।
मोदी के विरोद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पर्यावरण का संरक्षण किसी की निजी प्रतिष्ठा से ऊपर होना चाहिए। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए जानवरों को हमेशा एक से दूसरी जगहों भेजा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुशी ज़ाहिर की है।












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