लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी कराएंगे कांग्रेस को फायदा
[नवीन निगम] आप इस शीर्षक को पढ़कर अचरज में न आए। कांग्रेस को यदि अगला लोकसभा चुनाव लड़ना है तो वह राहुल गांधी से ज्यादा जोर नरेंद्र मोदी को भाजपा का प्रत्याशी बनाने में लगाए, क्योंकि यदि भाजपा के प्रथ्याशी नरेंद्र मोदी हुए तो तो सारा चुनाव मोदी बनाम धर्मनिरपेक्षता हो जाएगा। जिसमें कांग्रेस को फायदा होगा। मोदी अभी तक गुजरात में चुनाव लड़ते आ रहे है और वहां उनके रोकने का काम करती है कांग्रेस। यदि मोदी राष्ट्रीय परिदृश्य में छाए तो देश में उनके प्रबल विरोधी मुस्लिम अल्पसंखयक वोट कांग्रेस के पीछे लामबंद हो सकता हैं।
ऐसे में कांग्रेस को ऐसे कई प्रदेशों में फायदा हो सकता है जहां मुस्लिम वोट कांग्रेस को छोड़कर क्षेत्रीय पार्टियों में पड़ता है जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल। क्योंकि यहां लडऩे वाली क्षेत्रीय पार्टियों के बारे में कांग्रेस यह प्रचार करने में सफल रहेगी कि यह पार्टियां चुनाव बाद एनडीए की सरकार बना सकती है। मोदी के नाम से बिदकने वाला अल्पसंख्यक वोट काग्रेस के हाथ आसानी से आ जाएगा।

मोदी के प्रत्याशी होने से जनता का सारा ध्यान धार्मिक लामबंदी की ओर मुड़ जाएगा। जिससे महंगाई और भष्ट्राचार के मुद्दों पर कांग्रेस जवाब देने से बच जाएंगी। इसके अलावा मोदी के प्रत्याशी होने से भाजपा के सात किसी क्षेत्रीय पार्टी का चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हो पाएगा और चुनाव बाद भी पार्टियां मोदी के नाम पर बिदक जाएंगी।
मोदी के प्रत्याशी होने से कांग्रेस को सबसे बड़ा फायदा भाजपा में फूट का होगा। मोदी के प्रत्याशी बनते ही भाजपा दो खेमों में बंट जाएंगी। क्योंकि दो बार से पीएम बनने का सपना देख रहे आडवाणी और दो नंबर की प्रत्याशी सुषमा स्वराज के धड़े चुनाव के दौरान भीतरघात करने से नहीं चूकेंगे। इसके अलावा कई राज्यों के भाजपा मुख्यमंत्री जिसमें शिवराज चौहान का नाम प्रमुख है, मोदी का अपने राज्य में प्रचार करने पर आपत्ति जता सकते है। इसके अलावा चुनाव बाद यदि भाजपा का मोदी फैक्टर कामयाब नहीं रहा तब भी भाजपा के अंदर झगड़ा होना तय हैं। इसलिए कांग्रेस को तो मोदी को प्रत्याशी बनाने पर पूरा जोर लगा देना चाहिए।












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