बीजेपी ने अखिलेश को लिखी चिट्ठी, कहा वाराणसी के साथ भेदभाव?

जोशी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि समाचार-पत्रों के माध्यम से पता चला कि उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को अतिविशिष्ट जिलों का दर्जा प्राप्त है और वहां अन्य जिलों की तुलना में अधिक नागरिक सुविधाएं दी जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर उन जिलों में 24 घंटे बिजली मुहैया कराई जा रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने अपने पत्र में लिखा है, "मैं यह समझ पाने में असमर्थ हूं कि वही जनपद क्यों अतिविशिष्ट हैं, जहां कांग्रेस या समाजवादी पार्टी (सपा) के जनप्रतिनिधि हैं। उत्तर प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि अतिविशिष्ट जनपदों के चयन के मापदंड क्या हैं?"
उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से कहा है कि क्या जनपदों का ऐसा विभाजन डॉ. राम मनोहर लोहिया को स्वीकार हो सकता था? राज्य सरकार की यह नीति सामंतवादी मानसिकता की परिचायक तो है ही, भारतीय संविधान की मूल भावना के भी प्रतिकूल है।
वाराणसी की ऐतिहासिकता की याद दिलाते हुए जोशी ने अपने पत्र में कहा है, "वाराणसी देश ही नहीं, विश्व का सबसे प्राचीन और जीवित सांस्कृतिक नगर है। यहां भारत के विभिन्न अध्यात्मिक अनुभवों की एकात्मकता का अदभुत एवं सफल दिग्दर्शन हुआ है। इस नगर में अनेक भारत रत्न, पद्मविभूषण, पद्मभूषण एवं पदमश्री से सम्मानित लोग निवास करते हैं। संगीत, साहित्य, शिक्षा और कला का अनूठा केंद्र भी बनारस ही है।"
जोशी ने बनारस के बुनकरों की समस्याओं की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि बनारस में बुनकरों की अच्छी खासी संख्या सिल्क एवं कालीन व्यवसाय से जुड़ी है और उनके परिश्रम से भारत को विदेशी मुद्रा भी मिलती है, लेकिन सरकार की बिजली नीति की वजह से यह व्यवसाय चौपट होने की कगार पर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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