पीएम की कुर्सी पर होगा 3इडियट्स जैसा हाल

3 Idiots like situation for PM post
[नवीन निगम] आपने थ्री इडियट्स तो देखी होगी उसमें जब पहले सेमीस्टर का रिजल्ट निकलता है, तो रस्तोगी और फरहान को रेंचो के फेल होने का अफसोस होता है, लेकिन जब अगले ही पल उन्हें उसके टॉप करने का पता चलता है तो बैंकग्राउंड से आवाज आती है कि मित्र फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन यदि टॉप कर जाए तो उससे भी ज्यादा दुख होता है।

भारत में तीसरे मोर्चे के हिमाइती नेताओं का हाल लगभग इसी तरह का है। चुनाव के बाद यदि एनडीए या यूपीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तभी तीसरे मोर्च की परिकल्पना आकार ले सकेगी और तभी तीसरे मोर्च के संभावित प्रधानमंत्री के नाम पर विचार होगा। लेकिन अभी से कई छोटे-बड़े क्षत्रप अपने नाम को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किए हुए हैं। जिसमें उत्तर प्रदेश से मुलायम सिंह यादव, मायावती का नाम, बिहार से नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव, पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का नाम प्रमुख है। आइये आज हम एक-एक नाम की विवेचना करेंगे।

विवेचना इस बात की नहीं कि वह प्रधानमंत्री कैसे बनेंगे, विवेचना होगी कि इस बात की कि उनकी राह में रोड़ा कौन बनेगा। क्योंकि क्षेत्रीय शक्तियों के रूप में स्थापित ये नेता अपने ही बीच से किसी साथी को आगे निकलता देखने के लिए राजी नहीं होगे।

वो नाम हैं-

मुलायम सिंह यादव

तीसरे मोर्चे की सरकार बनने पर सबसे पहले यदि कोई नाम आगे आएगा तो वह है मुलायम सिंह यादव। लोकसभा सीटों के हिसाब से सबसे बड़े प्रदेश की सत्ता पर काबिज सपा के सुप्रीमो को भी यह कुर्सी अपने बहुत नजदीक दिखाई पड़ रही हैं लेकिन उप्र में सपा की सरकार जिन मुश्किलों में घिरती जा रही है उसे देखकर अब मुलायम सिंह की पार्टी के लोकसभा में ज्यादा सीटों के जीत पाने की संभावना कम ही दिखाई पड़ रही हैं। फिर भी मान लेते है कि तीसरे मोर्चा सरकार बनाता है तो उसके कौन-कौन घटक होगे और क्या वो मुलायम को अपना नेता मानने के लिए तैयार होंगे। तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी तो उसमें मायावती भी शामिल होगी क्योंकि खराब से खराब हालत में बसपा भी उप्र में 15 से 20 सीटें तो लाएंगी और तीसरे मोर्चे की सरकार में मुलायम प्रधानमंत्री हो यह मायावती को कतई बर्दाश्त नहीं होगा।

लेफ्ट और तीसरे मोर्चे के अन्य घटक मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर इतना आगे नहीं जाएंगे कि मायावती तीसरे मोर्चे से बाहर हो जाए. इसके अलावा तीसरा मोर्चा सरकार तभी बना पाएगा जब बिहार में लालू प्रसाद यादव को भारी जीत हासिल हो। यह किसी से छुपा नहीं है कि पिछली बार मुलायम तीसरे मोर्चे की सरकार में प्रधानमंत्री पद के बिलकुल करीब पहुंच गए थे लेकिन लालू उन्हें न बनाने की बात अड़ गए थे और अचानक देवगौड़ा प्रधानमंत्री के रूप में आगे आ गए। इसी तरह ममता भी वह क्षण भूली नहीं होगी जब मुलायम राष्ट्रपति चुनाव में ऐन मौके पर उनका साथ छोड़कर कांग्रेस से मिल गए थे। इस तरह मायावती और लालू के बाद ममता का समीकरण भी मुलायम को प्रधानमंत्री के पद से अलग करता है और यह तीनों व्यक्ति ऐसे है जो खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए आगे आएगे। इसलिए जब यह मुलायम के अलावा किसी और को चुनने के लिए कहेंगे तो इनकी बात को तीसरे मोर्चे के अन्य नेता खासतौर पर लेफ्ट नकार नहीं पाएगा।

मायावती

मायावती के सामने भी वहीं समस्या है जो समस्या मुलायम सिंह के सामने है। मायावती को पीएम सपा कभी बर्दाश्त नहीं करेंगी। पासवान और नीतीश भी मुलायम की तरह मायावती का पुरजोर विरोध करेंगे और यदि कांग्रेस का बाहरी समर्थन होगा तो कांग्रेस भी नहीं चाहेगी कि कभी उनका वोट बैंक रहे दलित हमेशा के लिए बसपा के साथ चले जाए।

नीतीश कुमार

नीतीश कुमार राजग से तभी बाहर आएगे जब भाजपा बहुत निराशाजनक प्रदर्शन करेगी और यदि भाजपा खराब प्रदर्शन करेगी तो नीतीश की पार्टी जद यू भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगी। मान लेते है कि नीतीश बिहार से लोस की १५ सीटें निकालकर ले आते है। तो सबसे पहले तीसरे मोर्चे के अन्य घटक इस बात पर ही अड़ जाएंगे की थोड़े दिनों पहले तक भाजपा से दोस्ती रखने वाले व्यक्ति को पीएम कैसे बना दिया जाए। इसके अलावा लालू और पासवान के अलावा मायावती भी उन्हें पीएम पद पर बैठाने के लिए राजी नहीं होगी। यहां भी रेचों वाला फार्मूला काम करेगा कि हम नहीं तो तुम भी नहीं।

ममता बनर्जी

ममता का पीएम बनना तो वैसे भी संभव नहीं है क्योंकि तीसरे मोर्चे का सबसे बड़ा घटक यदि कोई होगा तो वह लेफ्ट पार्टियां ही होगी। ऐसी स्थिति में लेफ्ट ममता के नाम पर कभी राजी नहीं होगा। हां यह बात अलग थी कि चुनाव से पहले यदि तीसरे मोर्चे का गठन होता जैसे जनता दल का हुआ था और ममता को उसका नेता चुना जाता तभी वह प्रधानमंत्री के पद पर पहुंच सकती थी। तीसरे मोर्चे को यदि कांग्रेस का बाहरी समर्थन हासिल हो तब भी अब ममता के कांग्रेस के संबंध इतने खराब चल रहे है कि कांग्रेस भी ममता के नाम पर राजी नहीं हो सकती।

लालू प्रसाद यादव

यहां रेंचो वाला फार्मूला फिर लागू होता हैं। लालू सारे किले फतह कर भी ले तो नीतीश, पासवान, मुलायम लालू को पीएम नहीं बनने देंगे और लालू जो आरोप नरेंद्र मोदी पर लगा रहे है चारा में लालू पर भी संगीन आरोप है इसलिए लालू भी पीएम पद की दौड़ से लगभग बाहर हैं और सबसे बड़ी बात यह हैं कि लालू इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं।

इसी तरह लेफ्ट से कोई नाम आता है तो ममता अड़ जाएगी और कांग्रेस को भी बात हजम नहीं होगी। जयललिता और नवीन पटनायक जानते है कि वो इस रेस में दौड़ ही नहीं रहे है। इसलिए यह निश्चित मान कर चलिए कि यदि तीसरे मोर्चे की सरकार आती है तो जो नाम आज पीएम पद के लिए उछल रहे हैं वो पीछे चले जाएंगे और कोई ऐसा नाम सामने आएगा जिसके बारे में आप अभी जानते भी नहीं होगे।

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