केजरीवाल जी अनशन करें, गलत रास्ता न दिखायें
नई दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली में कोई ऐसा इलाका नहीं जहां लोग कटिया लगाकर बिजली चोरी नहीं करते। कोई ऐसा इलाका नहीं, जहां पानी की बर्बादी नहीं होती हो। ऐसे में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की है कि वो बिजली-पानी के बिल नहीं दें। सच पूछिए तो यह अपील पूरी तरह गलत है। इससे आप उन लोगों के हौंसले बुलंद कर रहे हैं, जो शायद ही कभी बिल भरते हैं।
आज ही खबर आयी कि अगर यूपी में हर घर में प्रति दिन एक घंटा बिजली की बचत की जाये, तो 4 करोड़ प्रति दिन की बचत हो सकती है। जरा सोचिये अगर ऐसा ही दिल्ली में किया जाये, तो कम से कम 1 करोड़ प्रति दिन की बचत तो निश्चित होगी, लेकिन क्या करें राजनीति की नर्सरी में दाखिला लेने वाले केजरीवाल साहब राजस्व को बढ़ाने के बजाये घटाने के तरीके खोज रहे हैं।
जरा सोचिये अगर बिजली-पानी का बिल देना बंद कर देंगे, तो क्या होगा? जिस स्रोतों से बिजली खरीदी जा रही है, उसका पेमेंट रुक जायेगा और आने वाले समय में और भी ज्यादा किल्लत झेलनी पड़ेगी। अगर हर व्यक्ति प्रति दिन एक घंटा बिजली बचाये, तो कीमतें बढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़े।
अनिश्चितकाल के लिये भूख हड़ताल पर बैठे केजरीवाल चाहते हैं कि बिजली के दाम कम किये जायें। शहीद भगत सिंह की शहादत दिवस के मौके पर शनिवार को पूर्वी दिल्ली के पिछड़े सुंदर नगरी इलाके में केजरीवाल की भूख हड़ताल शुरू हुई। केजरीवाल का आरोप है कि बिजली कंपनियों ने दिल्ली सरकार की मिलीभगत से दाम बढ़ाये हैं। जबकि दिल्ली में बिजली के दाम पचास फीसदी कम होने चाहिए।
राजनीतिक पार्टियों जैसा रटारटाया बयान
इस भूख हड़ताल में केजरीवाल ने यह साफ कर दिया है कि इसका मकसद सिर्फ बिजली के दाम कम कराना नहीं है, बल्कि अपनी पार्टी की छवि को मजबूत करना भी है। केजरीवाल ने रविवार को वही रटारटाया बयान दिया, जो सदियों से राजनीतिक पार्टियां देती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि, "अगर मेरी सरकार आयी तो जिन लोगों के घरों की बिजली कटेगी, और केस दर्ज होंगे, वो सभी केस वापस ले लिये जायेंगे।"













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