मुलायम के बयान पर भाजपाई प्रसन्न
लखनऊ (नवीन निगम)। अगले लोकसभा चुनाव में यदि भाजपा को यूपी में उम्मीद से ज्यादा सफलता मिलती है तो इसमें भाजपा की अपनी मेहनत से ज्यादा योगदान सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह का होगा। राजधानी के गोलागंज स्थित रिफाहे आम क्लब मैदान में आयोजित जमीयत-उलेमा के जलसे में मुलायम सिंह यादव ने जब कहा कि हमारे लिए मुसलमानों का हित सर्वेपरि है और समाजवादी पार्टी की सरकार मुसलमानों के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
तो मैं उस समय भाजपा कार्यालय मैं ही मौजूद था एक साथी पत्रकार उधर मुलायम का कार्यक्रम कवर करके आ रहे थे। जैसे ही उन्होंने मुलायम सिंह द्वारा दिए गए बयान के बारे में बताया वहां मौजूद भाजपाई नेताओं के चेहरे पर रौनक आ गई। भाजपा नेताओं के खिले चेहरे यह साफ बता रहे थे कि मुलायम के इस बयान से सपा को फायदा हो न हो लेकिन भाजपा का फायदा तय है।

ऐसा नहीं है कि मुलायम जानते नहीं है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है लेकिन वह भी क्या करे जब दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने समाजवादी पार्टी से अपने रिश्ते नातों को तोड़ते हुए अपने दामाद विधानपरिषद सदस्य उमर अली खां और नागरिक सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष वसीम अहमद खां के इस्तीफे मुलायम सिंह यादव को भेज दिए और बेनी ने मुलायम पर आतंकवादियों को शरण देने का आरोप लगा दिया तो मुलायम को मुसलमानों के वोट बैंक को बचाए रखने के लिए ऐसा बयान देना जरुरी ही था।
ज्ञात हो कि गुजरात चुनाव के दौरान और अन्य समय में भी मुलायम ने कभी नरेंद्र मोदी का नाम कोसने के लिए भी नहीं लिया क्योंकि मुलायम को पता है कि यदि मोदी को कोसा भी तो फायदा भाजपा को ही होगा। लेकिन बुखारी के तेवर और कुंडा में एक मुसिलम डीएसपी और उसकी हत्या में राजा भैय्या जैसे नेता का नाम आने से भी वो इस तरह का बयान देने के लिए मजबूर थे।
बुखारी जो आजम खॉ के परम विरोधी माने जाते है, ने सपा के एक साल के कार्यकाल को मुसलमानों के लिए सबसे खराब साल बता दिया तो मुलायम की चिंता बढ़ गई। ज्ञात हो कि बुखारी ने कहा था कि प्रदेश में एक साल के सपा शासनकाल में 113 साम्प्रदायिक घटनाएं हो चुकी है इनमे 13 जगह कफ्र्यू लगा और सबसे ज्यादा नुकसान भी मुसलमानों का हुआ तथा प्रशासनिक पदों पर भी मुसलमानो को वाजिब हिस्सेदारी नहीं दी गयी। बुखारी ने कहा था कि सपा सरकार एक वर्ष पूरे होने पर नाकामियों का जश्न मना रही थी जो बेहद शर्मनाक है। साथ यह भी जोड़ा कि समाजवादी पार्टी केन्द्र का ख्वाब न देखे क्योकि जब तक उत्तर प्रदेश का मुसलमान साथ नहीं देगा तब तक यह संभव नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications