सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, देश न छोड़ पाएं इटली के राजदूत

न्यायालय ने सोमवार को यह आदेश अगली सुनवाई तक बढ़ा दी। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा, कुछ लोग लिख रहे हैं कि हम निष्प्रभावी हैं। हम रिपब्लिक ऑफ इटली से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं करते। वे हमारी अदालतों तथा न्याय व्यवस्था के बारे में क्या सोचते हैं? हमें आपसे इस तरह का कोई आश्वासन स्वीकार नहीं है कि आप भारत छोड़कर नहीं जाना चाहते। आपने हमारा भरोसा खो दिया है।
इससे पहले महान्यायवादी जीई वाहनवती ने न्यायालय को केरल तट से लगे अरब सागर में दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इतालवी नौसैनिकों को इस मामले में दोबारा सुनवाई के लिए भारत भेजने से इटली द्वारा इंकार किए जाने के बाद की स्थितियों से अवगत कराया। न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के इस दावे को खारिज कर दिया कि मेंसिनी को राजनयिक विशेषाधिकार प्राप्त हैं। न्यायालय ने कहा कि उन्होंने आश्वासन दिया था और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
इतालवी नौसैनिकों पर पिछले साल 15 फरवरी को केरल तट से लगे अरब सागर में दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है। न्यायालय ने 24-25 फरवरी को इटली में हुए आम चुनाव में मतदान के लिए आरोपी सुरक्षाकर्मियों को उनके देश जाने की अनुमति दी थी। तब भारत में इटली के राजदूत मेंसिनी ने न्यायालय को आश्वस्त किया था कि वे मतदान के बाद चार सप्ताह के भीतर भारत लौट आएंगे, जहां उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। लेकिन पिछले सप्ताह इटली सरकार ने इससे इंकार कर दिया। (आईएएनएस)












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