इंडिया टुडे कॉनक्‍लेव में नरेंद्र मोदी को सुनने के 5 कारण

नई दिल्‍ली। राजधानी के होटल ताज में चल रहे इंडिया टुडे कॉनक्‍लेव में जब गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कदम रखा तो पूरा प्रांगण उत्‍साह से भर गया। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनल तक हर जगह अपडेट आने लगे। अपने भाषण में मोदी ने हर एक मिनट को बांध कर रखा। उन्‍होंने गवर्नेन्‍स से लेकर यूपीए सरकार की खामियों तक हर बात पर प्रकाश डाला और भारत के संघीय ढांचे को बनाये रखने पर जोर दिया। उन्‍होंने बताया कि वो रिटेल का विरोध क्‍यों कर रहे हैं। गुजरात के विकास और पड़ोसी देशों से संबंध पर भी उन्‍होंने अपने विचार रखे।

इस भाषण में साफ दिखा कि एक दूरदर्शी राजनीतिज्ञ बोल रह है जो आम आदमी को बहुत करीब से देखता हो। मैं मोदी को इस भाषण के लिये फुल मार्क्‍स दूंगा। क्‍योंकि उन्‍होंने हर उस मुद्दे को उठया, जो हमसे जुड़े हैं। उन्‍होंने आम नागरिकों की समस्‍याओं का हल बताया साथ ही बताया कि अभी सर्वोत्‍तम समय आना बाकी है।

मोदी की इन्‍हीं बातों के साथ हम बताना चाहेंगे कि आखिर वो पांच कारण क्‍या हैं, जिनकी वजह से इंडिया टुडे कॉनक्‍लेव में भाषण सुना-

कारण 1. आकांक्षा और विकास, गवर्नेंस के नाम पर टुकड़ा नहीं फेंका!

मोदी ने अपने भाषण में नरेगा को उठाया और उसके बारे में विस्‍तार से बताया और कहा कि आम आदमी गवर्नेंस से ताल्‍लुक रखता है। उन्‍होंने सवाल उठाया कि जो लोग सत्‍ता में हैं, उन्‍होंने नरेगा की जगह डेवलपमेंट गारंटी स्‍कीम क्‍यों नहीं चलायी, इससे लोगों को खुद ब खुद रोजगार मिलता। उन्‍होंने कहा कि देश का समुचित विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक हम लोगों को यह अहसास नहीं दिलायेंगे कि वो जो कर रहे हैं वो राष्‍ट्र के लिये कर रहे हैं।

कारण 2. वो वहां पहुंचे, जहां कोई नेता सोचता तक नहीं

आपने पिछली बार कब सुना था, कि कोई नेता प्राइवेटाइजेशन की वकालत करे, जहां खराब राजनीति से बेहतर अच्‍छे अर्थशास्‍त्र को बढ़ावा दिया जाये। मोदी ने रेलवे के बारे में जो बात उठाई वो छोटी नहीं थी। अच्‍छे अर्थशास्‍त्र के अलावा, मोदी के दिमाग में एक बदलाव लाने की बात चल रही है। इतने सालों से हम अपनी ट्रेनों में गुणवत्‍ता और आराम लाने में असफल रहे हैं। पटरियां नहीं बढ़ीं, रेलवे स्‍टेशनों की हालत खस्‍ता है और भुगत आम आदमी रहा है। पिछले एक दशक में अलग-अलग राज्‍यों से आने वाले रेल मंत्रियों ने ट्रेनों को अपने-अपने राज्‍यों की ओर घुमा लिया।

अपने भाषण में मोदी ने जब इस बिंदु को चुनौती दी, तो मैं खुश हुआ कि चलो कम से कम कोई तो नेता है, जो बेबाक होकर अपनी बात रखता है और उसे इस देश की चिंता है।

कारण 3- हमेशा भारत पहले।

मोदी ने इस कॉनक्‍लेव में बतौर गुजराती बात नहीं की या किसी विशेष वर्ग से नहीं बल्कि बतौर भारतीय भाषण दिया। उन्‍होंने कहा कि भारत को पड़ोसी देशों से मित्रवत रिश्‍ते बनाने की जरूरत है, लेकिन हमारे हितों को दरकिनार करके नहीं। उन्‍होंने कहा, "मेरा सपना है कि एक दिन भारत खुद हथियार बनाये और दूसरे देशों को सप्‍लाई करे। ऐसा करने से गंदे हथियार दलालों से छुटकारा मिलेगा, जो कुछ डॉलरों के लिये बिक जाते हैं और हम आत्‍मनिर्भर भी होंगे, हमारा देश गर्व के साथ खड़ा होगा।"

कारण 4 क्‍योंकि वे व्‍यस्‍त रहना चाहते हैं

जब मोदी को सुनना शुरू किया, तो लगा वो थोड़ी ही देर बोलेंगे। भाषण के बाद कई सवाल भी किये गये, उनके जवाब उन्‍होंने बहुत करीने से दिये। ऐसे देश में जहां राज करने वाला परिवार आगे नहीं आता, प्रधानमंत्री बहुत कम बोलते हैं, वहां मोदी खुलकर सांस लेते हैं और कहते हैं कि मैंने आज तक नहीं देखा कि केंद्र का कोई नेता आम आदमी से मिले हों, क्‍योंकि वो अपने में व्‍यस्‍त रहना चाहते हैं।

कारण 5- सबसे महत्‍वपूर्ण यह क्‍योंकि वो तथ्‍यों पर बात करते हैं

जब राहुल कनवाल ने मोदी से पूछा कि क्‍या उनकी मां ने सोचा है कि आप प्रधानमंत्री बनें, मोदी ने जवाब दिया यहां चर्चा विकास की चल रही है, माता और पिता ऐसे में कोई मायने नहीं रखते! नरेंद्र मोदी ही हैं जो कहते हैं- कोई भावुक्‍तापूर्ण कथा काम नहीं आती, कोई मां रोती नहीं, सिर्फ काम बोलता है।

हर मुद्दे पर मोदी ने तथ्‍यों के साथ जवाब दिये। चाहे बात सॉलिड वेस्‍ट मैनेजमेंट की हो, या सोलर पावर प्रोजेक्‍ट की। मोदी ने आंकड़ों के साथ जवाब दिये। मोदी तैयारी के साथ नहीं आते, बल्कि वो हमेशा तैयार रहते हैं।

यह लेख किशोर त्रिवेदी के अंग्रेजी में लेख का सार है।

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