नरेंद्र मोदी की 3 बातों के पीछे क्‍या है लॉजिक?

[अजय मोहन] इंडिया टुडे कॉनक्‍लेव में नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद सत्‍ताधारी पार्टी यूपीए की तरफ से कोई बयान तो नहीं आया, लेकिन मन में हलचल जरूर पैदा हो गई, कि जो मोदी सोचते हैं, वो हम क्‍यों नहीं सोच पाते। जी हां ऐसा इसलिए क्‍योंकि मोदी ने बातों ही बातों में तीन ऐसी टिप्‍स दे डालीं, जिन पर अमल किया जाये तो भारत को विकसित देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। ये टिप्‍स उनके लिये हैं, जिनके हाथों में देश की कमान है।

आज यूपीए है तो हो सकता है कल एनडीए की सरकार हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं, कि अगर इन सुझावों पर अमल किया जाये तो हम शक्तिशाली देश बन सकते हैं। वो टिप्‍स इस प्रकार हैं-

1. संघीय ढांचा

मोदी ने कहा- वर्तमान यूपीए सरकार ने देश के संघीय ढांचे को तोड़ कर रख दिया है।

इसके पीछे लॉजिक- मोदी की यह बात 100 फीसदी सही है। इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण राहुल गांधी और सोनिया गांधी की रैलियां हैं, जहां वो हर मामले में दोषी राज्‍य सरकारों को ठहरा देते हैं। ऐसा ही तब होता है, जब गैर-कांग्रेसी सरकारें मुसीबत में फंस जाती हैं, वो केंद्र को दोषी ठहराती हैं। ऐसे में गैर-कांग्रेसी राज्‍य खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। अगर मोदी के इस सुझाव पर अमल किया जाये, तो केंद्र सरकार सभी राज्‍यों को एक-जुट करके आगे बढ़ सकती है।

Gujarat chief minister Narendra Modi

2. हथियार खरीदे नहीं बेचें

मोदी ने कहा- दलाली की नौबत ही न आये, अगर हम खुद हथियार बनायें और देश को सशक्‍त बनायें। अरे खरीदने के बजाये अगर हम खुद हथियार सप्‍लाई करें, तो सोचिये क्‍या हो।

इसके पीछे लॉजिक- मोदी की इस बात में भी दम है, क्‍योंकि रूस, अमेरिका और चीन जैसे देश बात-बात पर अपनी दादागिरी सिर्फ इसीलिये दिखाते हैं, क्‍योंकि सैन्‍य उपकरणों के मामले में वो बहुत आगे हैं। अर्थशास्‍त्री की दृष्टि से देखें तो चाहे सोना या हथियार, खदीतदे वक्‍त आखिर बाहर तो डॉलर ही जाता है। जितना ज्‍यादा रुपया डॉलर में परिवर्तित होकर बाहर जायेगा, उतना ही वो कमजोर होगा और पेट्रोल खरीदने में उतनी ही ज्‍यादा कीमत हमें चुकानी होगी। आज अगर एक डॉलर की कीमत 48 रुपए है और पेट्रोल 76 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। कल जब डॉलर की कीमत 70 रुपए होगी, तब सोचिये पेट्रोल की कीमत कितनी होगी। निश्चित तौर पर 100 रुपए से अधिक। तब आप महंगाई का अंदाजा लगा सकते हैं। यही अगर खरीदने के बजाये बेचने का ट्रेंड शुरू कर दें, तो रुपए मजबूत होने लगेगा।

3. डेवलपमेंट गारंटी स्‍कीम

मोदी ने कहा- यूपीए सरकार ने महात्‍मा गांधी नैशनल रूरल इंम्‍प्‍लायमेंट गारंटी स्‍कीम चलायी। इसकी जगह डेवलपमेंट गारंटी स्‍कीम क्‍यों नहीं चलायी?

इसके पीछे लॉजिक- मोदी की इस बात के पीछे भी बड़ा लॉजिक छिपा है। नरेगा कितनी सफल हुई है, यह बात खुद राहुल गांधी खुद अपने भाषणों में कह चुके हैं। यूपी में वो जब-जब आते हैं, कहते हैं नरेगा के अंतर्गत भेजा गया पैसा गरीबों तक पहुंचा नहीं। यानी कुल मिलाकर केंद्र सरकार इस स्‍कीम को चलाकर भी रोजगार की गारंटी नहीं दे पायी। अब जरा सोचिये अगर नैशनल डेवलपमेंट गारंटी स्‍कीम चलायी जाये तो क्‍या होगा। हर ग्रामीण इलाकों में स्‍कूल, अस्‍पताल, डाक खाने, आदि खुलेंगे, सड़कें बनेंगी, बिजली पहुंचेगी और बहुत कुछ होगा। शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का स्‍तर का स्‍तर खुद-ब-खुद ऊपर उठेगा। तो क्‍या आपको नहीं लगता कि इतनी सुविधाओं के बाद कोई भी बड़ी कंपनी उस इलाके में निवेश करने से पीछे हटेगी? जी हां जरूर करेगी और तब रोजगार खुद-ब-खुद चलकर आयेगा।

जरा सोचिये अगर ऐसा संभव हो जाये तो क्‍या होगा- देश में गांव से लेकर शहर की ऊंची इमारतों तक विकास की लहर दौड़ेगी, जब हम ज्‍यादा से ज्‍यादा चीजें बेचने लगेंगे तो रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा और देश की अर्थव्‍यवस्‍था कहीं आगे निकल जायेगी और जब लोगों को आसानी से रोजगार मिलेगा तो क्‍या भारत विकसित देशों में नहीं गिना जायेगा? इस प्रश्‍न का जवाब आप सोचिये और नीचे कमेंट जरूर करिये।

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