यहां पिता खुद बेचते हैं बेटियों का जिस्म
कोई कितना भी गरीब या फिर हालात का मारा क्यों न हो वह अपनी बेटी और बीबी को जिस्म बेचने के लिये कभी नहीं कहेगा। गरीब से गरीब व्यक्ति यह कभी नहीं चाहेगा कि उसकी जिंदगी उसे ऐसे पायदान पर लाकर खड़ा कर दे कि उसे अपनी ही इज्जत से इज्जत का सौदा करने को कहना पड़े। मगर एक कहवात है कि जब गरीबी दरवाजे से आती है तो इज्जत और इमान खिड़की से भाग जाते हैं।
बहादुरी की तमाम गाथाओं के गवाह बुंदेलखंड की कुछ ऐसी ही हालत है। उत्तर प्रदेश का यह जिला पूरी तरह से सूखे की चपेट में है और सूखा लगातार यहां की बेटी और बीबीओं की इज्जत लूट रहा है। सूखे और उससे उपजी गरीबी ने बुंदेलखंड की महिलाओं को जिस्मफरोशी पर मजबूर कर दिया है। सरकारी मदद की आश में यहां के लोग (खासकर महिलाएं) अपनी जान और पेट की भूख मिटाने के लिये खामोश जंग लड़ रही हैं। तो आईए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों को मिलाकर बनने वाले बुंदेलखंड की मार्मिक दशा पर न्यूज वेबसाइट के कुछ आंकड़ों के साथ विस्तार से चर्चा करते हैं।

बेच दे रहे हैं बेटियों की आबरू
कुछ समय पहले की आकंड़ों पर नजर डालें तो अब यह साफ हो गया है कि बुंदेलखंड की बेटियों को बहला-फुसलाकर जिस्म के बाजार में बेचा जा रहा है। कुछ समय पूर्व जिले में एक सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ था। इस सेक्स रैकेट का खुलासा करने में पुलिस की मदद पन्ना जिले के मझगवां की रहने वाली आदिवासी नाबालिग युवती ने की थी। आप सुनकर चौंक जाएंगे कि इस युवती को कुछ साल पहले महज 5 हजार रुपये में बेच दिया गया था।

नामी होटल हैं खरीददार
अदालत में बयान के दौरान इस युवती ने बताया था कि उसके पिता की मौत के बाद अपनी अंधी मां के साथ रह रही थी। मगर 3 साल पहले उसके साथ ही रहने वाली एक लड़की ने उसे जिस्म के कारोबारियों के हाथों 5 हजार रुपये में बेच दिया था। उसने बताया कि उसे दिल्ली, मुंबई, झांसी और खजुराहों के नामी होटलों में कस्टमर को खुश करने के लिये भेजा जाता था। बुंदेलखंड की बेटियों की हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि मौका लगते ही देह व्यापार के सरगना लड़कियों को बेच देते हैं।

बाप खुद लगाता है बेटी की बोली
उपर लिखे इस छोटी सी लाइन को पढ़कर ही आप समझ चुके होंगे कि जिंदगी किस मोड़ पर खड़ी होगी। बुंदेलखंड सहित मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, राजगढ़ जिले में कुछ घुमंतू जातियां खासकर बेड़िया जाति के लोग खुलेआम देहमंडी सजाते हैं जहां उनकी बेटियां वेश्यावृत्ति करती हैं। कई गांवों में यह शर्मनाक काम खुलेआम चल रहा है। यही नहीं, इन लड़कियों को उनके पिता ही परंपरा के नाम पर इस धंधे में धकेल रहे हैं।

बेटियां करें देह व्यापार, बहू खाना पकाये
इन विशेष गांवों में सिर्फ बेटियों से ही देह व्यापार कराया जाता है, वहीँ घर की बहुओं को सिर्फ खाना बनाने और साफ-सफाई तक सीमित रखा जाता है। बेड़िया जाति के पुरुष अपनी बेटियों को सब कुछ जानते हुए भी इस दलदल में धकेल देते हैं। इस प्रथा का सबसे बुरा पहलू यही है कि एक बाप अपनी ही बेटी को जिस्मफरोशी करने के लिए प्रेरित करता है और उसे इसका कोई पछतावा भी नहीं होता। ऐसा नहीं है कि सरकार इस ओर कुछ नहीं कर रही लेकिन यह लोग वर्षों से चली आ रही इस हैरान कर देने वाली परपंरा से पीछा छुड़ाने को तैयार ही नहीं है।

सूखे ने सूखा दिये हैं इंसानी जज्बात
सूखे ने बुंदेलखंड के भौगालिक दशा के साथ ही साथ वहां के रहने वाले इंसानों के जज्बात को भी सुखा दिया है। हालात ये है कि जिसे कोख से जन्मा उसकी परवरिश या फिर जिस परिवार में ब्याही उसे पालने के लिये महिलाएं स्टांप पेपर पर लिखकर खुद की इज्जत बेच रही हैं। मगर इन महिलाओं की दिल दहला देने वाली हकीकत से कम ही लोग वाकीफ होंगे। भुखमरी और गरीबी की मार झेल रहे इस इलाके के लोगों ने पहले जानवर बेचे, फिर जमीन बेची अब यहां औरतें नीलाम हो रही हैं। सूखे और कर्ज की मार से बेहाल किसान अपनी पत्नियों का सौदा कर रहे हैं। इसके एवज में किसान कुछ पैसे लेने को मजबूर हैं।

पत्नियों की भी लगती है कीमत
इन किसानों की पत्नियों की कीमत 4,000 से लेकर 12,000 में लगाई जा रही है। जितना सुन्दर चेहरा उतना ज्यादा मूल्य। स्टांप पेपर की आड़ में जिस्म के सौदागर जमकर फायदा उठा रहे हैं। कानून से बचने के लिए कचहरी में वकीलों की मौजूदगी के सामने स्टांप पेपर पर खरीद-फरोख्त हो रही है। औरतों का सौदा करने वालों ने इसे नाम दिया है विवाह अनुबंध। एक ऐसा विवाह जिसमें न अग्नि है, न फेरे हैं, न सप्तपदी है बस 10 रुपये के कागज के टुकड़े पर शादी का एग्रीमेंट और बिक गई औरत।












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