कर्नाटक कांग्रेस ने भाजपा से सीखा सफलता का मंतर
बेंगलुरू। कर्नाटक में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय निकाय चुनाव में करारी हार का डंका दिल्ली तक बज चुका है। कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत से भाजपा के कई बड़े नेता टेंशन में आ गये हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है, कांग्रेस ने सफलता का यह मंत्र किसससे सीखा है? अरे भाजपा से! जी हां और वो मंत्र है हिन्दुत्व का।
कर्नाटक के कुल 207 स्थानीय निकायों की 4,952 सीटों के लिए हुए मतदान की गुरुवार को हुई मतगणना में 1,959 सीटों पर जीत दर्ज करके कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भाजपा को कुल 906 सीटों पर जीत मिली। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) को 905 सीटों पर जीत मिली। भाजपा की हार के कारण सभी जानते हैं।

सभी जानते हैं कि भाजपा के अंदर पिछले दो साल से चल रही अंतर-कलह के कारण संगठन में एक नहीं कई दरारें आ चुकी हैं। यही कारण है कि भाजपा अपना आधार खोती जा रही है। बीएस येदियुरप्पा के पार्टी से अलग होने के बाद पार्टी कमोर पड़ी इसमें कोई शक नहीं। हालांकि येदियुरप्पा की पार्टी अलग होकर भी मजबूत नहीं हो सकी है। उसे मात्र 274 सीटें ही मिली हैं।
खास बात यह है कि कांग्रेस ने इस मौके को भुनाने में जरा भी कसर नही छोड़ी। कांग्रेस ने जनता के बीच विश्वास कायम करने के लिये भाजपा का ही मंतर फूंक दिया। और वो था हिन्दूवादी मंतर। पिछले दो साल से जितने भी पर्व हुए, उनमें कांग्रेस ने हिन्दुओं को आकर्षित करने या बधाई देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर बेंगलुरू की बात करें तो हर पर्व पर यहां यशवंतपुर से लेकर मल्लेश्वरम तक, जेपी नगर से लेकर जयानगर तक पोस्टरों से सड़कें पाट दीं।
जो काम भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर करती थी, वही काम कांग्रेस ने अयुधा पूजा, मकर दीवाली, संक्रांति, पोंगल, आदि में किया। यही नहीं निकाय चुनाव के बाद भी शिवरत्रि के पावन मौके पर भी कांग्रेस ने मौको को छोड़ा नहीं। कर्नाटक में आप कांग्रेस के पोस्टरों पर भगवान की तस्वीरें आसानी से देख सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे भाजपा के पोस्टरों पर दिखाई देते थे।
खबर यह है कि कांग्रेस की यह मुहिम अभी विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव 2014 तक जारी रहेगी, क्योंकि कांग्रेस पर कब्जा करने के लिये कर्नाटक में इससे अच्छा मौका जल्दी नहीं आयेगा।












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