कामकाजी महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने वाला बिल पारित

इस विधेयक में यौन उत्पीड़न के दयरे को बढ़ाकर उसकी परिभाषा को भी बदला गया है। नौकरी देने के नाम पर झांसा देना भी अब यौन उत्पीड़न के दायरे में शामिल हो गया है। इस बिल के तहत उन्हें भी जहग दी हगई जो उस जहग पर काम तो नहीं करती लेकिन वहां कस्टमर के तौर पर आती जाती रहती है। इस बिल में सरकार ने हर ऑफिस को शिकायत एक शिकायत निवारण सेल बनाने का आदेश जारी किया है। अगर कोई कार्यायल ऐसा नहीं करता है तो उनपर 50,000 रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
क्या है इस बिल की खासियत
इस बिल में ऐसे संस्थानों को भी शामिल किया गया है जहां 10 से कम कर्मचारी काम करते है जो सर्विसेज रुल्स के तहत नहीं आते हैं।
इस बिल में ऑफिस के अलावा घरों में काम करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
इस बि ल में ऑफिसों को निर्देश दिए गए है कि वो शिकायत निवारण सेल बनाए।
नियम का उल्लधंन करने वालों पर 50,000 का जुर्माना लगाया जाए।
अगर नियम का उल्लधंन बार-बार होता है तो रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा।
यौन उत्पीड़न के दायरे में किसी भी तरह का अश्लील व्यवहार, छेड़खानी, शारीरिक छेड़छाड़, संबंध बनाने के लिए मजबूर
करना या शारीरिक संबंध की मांग करना शामिल किया गया है।
बिना जान कारी के अश्लील वीडियो दिखाने को भी गैरकानूनी माना गया है।
अगर महिला अधिकार का गलत इस्तेमाल करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान।
बिल को मंजूरी मिलने के बाद सीपीएम नेताओं ने इसमें कुछ प्रावधानों को बदलने की मांग की है। गौरतलब है कि दिल्ली गैंगरेप के बाद से ही सरकार महिला सुरक्षा को लेकर काफी संवेदनशील हो गई है। आने वाले चुवानी सालों को देखते हुए कांग्रेस सरकार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है, इसलिए महिला सुरक्षा विधेयक को जल्द से जल्द कानून का रुप देकर लोगों के गुस्से को शांत करना ताहती है।












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