यूपी: 1 नहीं 45 मामले दर्ज हैं रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर
प्रतापगढ़। यूपी के कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ने डीएसपी मर्डर केस में नाम आने पर अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंप दिया है जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस बात की जानकारी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मीडिया को दी है।
मालूम हो कि कुंडा के विधायक राजा भैया पर प्रतापगढ़ जिले के डिप्टी एसपी जियाउल हक की हत्या का आरोप लगा है जिसके तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनके करीबी गुड्डू सिंह और राजीव सिंह को रविवार को गिरफ्तार किया गया है।
डिप्टी एसपी जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस में राजा भैया और उनके करीबियों कुंडा पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव, शमित सिंह, हरिओम श्रीवास्तव और गुड्डू सिंहके खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। उसने राजा भैया पर इपने पति की हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। जिसके बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए गिरफ्तारी की है।
वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है कि राजा भैया के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है। आपको बता दें कि राजा भैया के खिलाफ 45 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं उनके ऊपर हत्या, अपहरण, मारपीट जैसे कई संगीन अपराध दर्ज है। हालांकि कई मामलों में वो बरी हो गये हैं लेकिन अभी भी कई मामलों में फैसला नहीं आया है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राज भैया
कुंडा रियासत के भदरी घराने से आने वाले राजा भैया जेल में रहकर सजा भी काट चुके हैं। 1993 में हुए विधानसभा चुनाव से कुंडा की राजनीति में कदम रखने वाले राजा भैया को उनकी सीट पर अभी तक कोई हरा नहीं सका है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाले रघुराज प्रताप सिंह ने पहली बार कुंडा सीट से निर्दलीय के रूप में चुनाव जीता था। उनकी जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। मुलायम सिंह के बेहद करीबी राजा भैया और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राज भैया
राजा भैया की कट्टर दूश्मन रही यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जिन्होंने राजा भैया को खुले आम कुंडा का गुंडा कहकर संबोधित किया था।बावजूद इसके राजा भैया अपने निर्वाचन क्षेत्र कुंडा से हर बार रिकार्ड वोटों से जीतते आ रहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनावों में राजा भैया ने प्रदेश में सबसे बड़ी जीत दर्ज की। रघुराज को 1,11,392 वोट मिले।
उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी को 23, 137 वोट मिले वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार को 14341 वोट ही मिल सके। कुंडा विधानसभा सीट पर राजा भैया की निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उनकी लगातार पांचवी जीत है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राज भैया
साल 2002 में मायावती सरकार ने राजा भैया पर पोटा लगाया। साल 2003 में फिर से सूबे में मुलायम सिंह की सरकार आई और सरकार आने के 25 मिनट के भीतर ही राजा भैया से पोटा संबंधी आरोप हटा दिए गए हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में सरकार को पोटा हटाने से रोक दिया। 2004 में राजा भैया पर से पोटा आखिरकार हटा लिया गया। मुलायम सरकार में मंत्री बनने पर और उन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्रदान कर दी गई। मुलायम ने उन्हें फिर से अपने मंत्रायल में साल 2005 में खाद्य मंत्री बनाया।
लेकिन इसी साल उनके घर पर छापा मारने वाले पुलिस ऑफिसर आर एस पांडे की सड़क हादसे में मौत हो गयी जिसकी वजह से एक बार फिर से राजा भैया विवादों और सवालों के घेरे में आ गये।विपक्ष ने कहा कि पांडे की मौत के जिम्मेदार राजा भैया ही हैं। मायावती के कार्यकाल में राजा भैया पर खासी निगाहें रखी गयीं।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राज भैया
लेकिन पिछले साल सपा की सत्ता में वापसी हुई और राजा भैया फिर से मंत्रिमंडल में शामिल हो गये। कहा जा रहा था कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव के कहने पर ना चाहते हुए भी अखिलेश यादव ने उन्हें जंल मंत्री बनाया था। शपथ लेते समय भी राजा भैया विवादों में घिर गये थे। उनकी उम्र को लेकर बहस हुई थी।
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन के दौरान राजा भैया ने अपनी उम्र 38 साल बताई थी। यानी कि वह जब पहली बार 1993 में विधायकी का चुनाव लड़े थे तो उनकी उम्र मात्र 19 साल थी। जबकि चुनाव लड़ने के लिए कम से कम व्यक्ति की उम्र 25 साल होनी चाहिए। जिस पर राजा भैया ने कहा कि उनकी उम्र के साथ स्कूल के सार्टिफिकेट से छेड़खानी की गयी है। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राज भैया
अभी इसी महीने अखिलेश मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ जिसमें राजा भैया से जेल मंत्रालय लेकर खाद्य मंत्रालय सौंप दिया गया था, जिससे आज रघुराज प्रताप सिंह ने इस्तीफा दे दिया है।
कुंडा के विधायक राजा भैया पर प्रतापगढ़ जिले के डिप्टी एसपी जियाउल हक की हत्या का आरोप लगा है जिसके तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनके करीबी गुड्डू सिंह और राजीव सिंह को रविवार को गिरफ्तार किया गया है।












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