मीडिया द्वारा बनाई गयी संत हैं मदर टेरेसा: सर्वे

नई दिल्‍ली। दुनिया भर में गरीबों और असहायों की मदद करने के लिए जानी जाने वाली मदर टेरेसा के बारे में एक कनेडियन रिसर्च में दावा किया गया है कि मदर टेरेसा को लोगों की सहायता करने में कोई रूचि नहीं थी, बल्कि वह सिर्फ लोकप्रियता पाने और अपनी छवि बनाने के लिए ऐसा करती थी। इस काम में मीडिया ने उनकी मदद की। वास्‍तव में वह मीडिया के द्वारा बनाई गयी संत हैं।

कनेडियन मैगजीन में छपे शोध में शोधकर्ता सर्ज लारवी और जिनेवेव ने कहा है कि मदर टेरेसा की छवि को चमकाने में न सिर्फ मीडिया की मदद ली गई बल्कि उन्‍हें प्रमोट करने के लिए मैककन मुगरेज ने मिशन आफ चैरिटी पर एक फिल्‍म भी बनाई। इस‍ फिल्‍म में दिखाया गया है कि एक मोनिका नाम की लड़की के चमत्‍कार के कारण दर्द से कराहते मरीज सही हो जाते हैं, यह दरअसल कुछ दवाओं का ही प्रभाव था। इसमें चमत्‍कार जैसी कोई बात नहीं थी।

Mother Teresa

शोध में मदर टेरेसा के बारे में कहा गया है कि वह लोगों का हमदर्द होने का दिखावा करती थी और दुनिया के सामने अपनी अच्‍छी छवि बनाना चाहती थी। उन्‍होने धन का इस्‍तेमाल कर अपनी शार्ट फिल्‍म बनवाई और साथ ही इन्‍हें मीडिया में प्रमोट भी किया। इस काम में उन्‍होने जानी मानी कोडेक कंपनी की भी मदद ली। मदर टेरेसा को ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करने वाला बताया गया है और कहा गया है कि वह ऐसे समय में भारत आयी थी जब ईसाई धर्म पर संकट था। उन्‍होने धर्म का प्रचार प्रसार तो किया ही साथ ही विश्‍व स्‍तर पर खुद की इमेज भी बनाई।

शोध में वर्णन किया गया है कि मदर टेरेसा की मृत्‍यु के बाद वेटिकन द्वारा उन्‍हें संत का दर्जा देने की कवायद भी जा रही थी लेकिन पुख्‍ता सबूतों के अभाव में इस कोशिश को अंतिम रूप न दिया जा सका। शोधकर्ताओं की इस रिपोर्ट से पश्चिम बंगाल के लोगों को काफी दुख हुआ है क्‍योंकि मदर को पश्चिम बंगाल से खास जुड़ाव के कारण जाना जाता था।

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