रेल बजट 2013: मंत्री जी यह चाहती है जनता

नई दिल्‍ली (वनइंडिया ब्‍यूरो)। रेलमंत्री पवन बंसल मंगलवार को रेल बजट पेश करने वाले हैं। बजट तैयार करने से पहले तमाम बैठकें हुईं, नेताओं और अधिकारियों ने विचार विमर्श किया, लेकिन जनता से खुले मंच पर कुछ नहीं पूछा गया। जोकि होना चाहिये था। खैर फिर भी जनता ने ट्विटर के जरिये अपनी बात रखी है और यह बताने के प्रयास किये हैं कि वो रेल मंत्री से क्‍या चाहते हैं।

अगर सामूहिक तौर पर देखें तो देश की जनता चाहती है कि रेलवे सबसे पहले सफाई व्‍यवस्‍था पर ध्‍यान दे। राजधानी, शताब्‍दी और बड़ी एक्‍सप्रेस ट्रेनों के एसी कोच छोड़ दें, तो बाकी लगभग सभी ट्रेनों में टॉयलेट की हालत बद से बदतर है। जनरल क्‍लास के डिब्‍बों के टॉयलेट देखें तो कोई भी यही कहेगा कि रेलवे सिर्फ अमीरों के स्‍वास्‍थ्‍य की फिक्र करता है, गरीबों की जिंदगी का कोई मोल नहीं।

रेल बजट 2013 पर विशेष पेज

दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है प्‍लेटफॉर्म। दिल्‍ली हो या मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद या लखनऊ। जिस प्‍लेटफार्म पर शताब्‍दी, राजधानी या दुरंतो आनी होगी, उसे तो ऐसे चमकाया जाता है, मानों कोई मेहमान घर पर आ रहा हो। बाकी के प्‍लेटफॉर्म के हालात जस के तस रहते हैं। किसी को कोई फिक्र नहीं। चारों तरफ गंदगी और कूड़ा-करकट। रेलवे के सेनिटरी इंस्‍पेक्‍टर ने वनइंडिया से बातचीत में बताया कि प्‍लेटफार्म और डिब्‍बों की गंदगी दो अलग-अलग विभागों के हाथ में होती है। पहली सरकारी तो दूसरी प्राइवेट। प्‍लेटफॉर्म की सफाई की जिम्‍मेदारी रेलवे के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के पास होती है, वहीं डिब्‍बों की सफाई के लिये हर साल ठेका उठता है। लिहाजा जब कोई ट्रेन आती है, और डिब्‍बे की सफाई के बाद जब कूड़ा-करकट प्‍लेटफॉर्म और पटरी पर बहा दिया जाता है, तो रेल कर्मी उस निजी कंप‍नी को जिम्‍मेदार ठहराते हुए पल्‍ला झाड़ लेते हैं।

यह तो रही सफाई जो हर कोई चाहता है इसके अलावा और क्‍या चाहते हैं लोग देखें स्‍लाइडर में।

शहरों में अंडरपास हों

शहरों में अंडरपास हों

पीयूष (@piyushrou) कहते हैं कि हर शहर में ट्रेनों के लिये अंडरपास बनवाये जाने चाहिये, ताकि ट्रैफिक नहीं जाम हो।

मैकडॉनल्‍ड बर्गर चाहिये

मैकडॉनल्‍ड बर्गर चाहिये

गुरिंदर सिंह अहलूवालिया (‏@Guri0) लिखते हैं कि भारतीय रेल को ट्रेनों में मैकडॉनल्‍ड के बर्गर की सुविधा देनी चाहिये, कम से कम शताब्‍दी और राजधानी में तो होनी ही चहिये।

प्रमुख स्‍टेशनों के बीच डबल ट्रैक

प्रमुख स्‍टेशनों के बीच डबल ट्रैक

मानस भट्ट (‏@SpaceMana) ने ट्विटर पर लिखा कि देश के सभी बड़े शहरों के बीच डबल ट्रैक जरूर होना चाहिये। सभी रेलवे क्रॉसिंग पर अटेंडेंट जरूर हो।

टॉल फ्री नंबर चाहिये

टॉल फ्री नंबर चाहिये

एक्‍ला चलो (‏@chandra208) लिखते हैं कि पूरे देश के लिये एक टॉल फ्री नंबर होना चाहिये, जिस पर इमर्जेंसी में कॉल किया जा सके, खास तौर से उस समय जब सुरक्षा को लेकर खतरा हो।

सुविधाओं को बेहतर बनायें

सुविधाओं को बेहतर बनायें

यंगवान (‏@Gunmaster_G9 ) लिखते हैं कि 100 ट्रेनें चलाने से अच्‍छा है, जितनी ट्रेनें चल रही हैं उनकी सुविधाओं को बेहतर बनायें।

खाने के साथ कंप्रोमाइज नहीं हो

खाने के साथ कंप्रोमाइज नहीं हो

बेंगलुरु की सोनिका का कहना है कि ट्रेन चाहे राजधानी हो या शताब्‍दी या फिर साधारण एक्‍सप्रेस ट्रेन खाने के साथ कंप्रोमाइज़ नहीं करना चाहिये।

शौचालय साफ होने चाहिये

शौचालय साफ होने चाहिये

उन्‍नाव के ईश्‍वर भारतीय कहते हैं कि ट्रेनों के शौचालय साफ होने चाहिये।

किराया कम हो और ट्रेनें समय पर आयें

किराया कम हो और ट्रेनें समय पर आयें

बड़ौदा के अनुज प्रजापति का कहना है कि किराया न बढ़ायें साथ ही ट्रेनें समय पर आनी चाहिये। लेट होने से समय की बर्बादी बहुत होती है।

ईमू ट्रेनों में भी हों शौचालय

ईमू ट्रेनों में भी हों शौचालय

लखनऊ के इंद्रेश सक्‍सेना का कहना है कि लोकल ट्रेनों अथवा ईमू ट्रेनों में शौचालय होने चाहिये। उन ट्रेनों में तो खास तौर से जो 80 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं।

सॉकेट ठीक करायें

सॉकेट ठीक करायें

बेंगलूरु की अवंतिका कहती हैं कि ट्रेनों में मोबाइल चार्ज करना कई बार जरूरी हो जाता है, लेकिन सॉकेट खराब होने की वजह से नहीं होता। अगर सुविधा दी है, तो उसे बीच-बीच में दुरुस्‍त करते रहें।

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