नेपाल बॉर्डर से आतंक की सप्लाई करता है पाकिस्तान!

आपको यह जानकर हैरत होगी कि जो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) हैदराबाद धमाकों की जांच कर रही है, उसी एनआईए ने दिसंबर 2012 में सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी करने का सुझाव दिया था। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में फलफूल रहे आतंकी संगठनों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिये पाकिस्तान नेपाल के रास्ते पैसा भेजता है। वो भी नकली नोट। नेपाल के रास्ते आने वाले नकली नोट यहां असली की जग चला दिये जाते हैं और उसमें इकठ्ठा होने वाला पैसा इन संगठनों को चला जाता।
हम यह नहीं कह रहे हैं कि हैदराबाद के दिलसुखनगर में धमाका करने वाले नेपाल के रास्ते आये थे, लेकिन ऐसी आशंका जरूर है, क्योंकि आज पकड़े गये दोनों आतंकी नेपाल के रास्ते भागने की फिराक में थे। इस गिरफ्तारी से एक आशंका पैदा होती है कि हो सकता है हैदराबाद बम धमाकों को अंजाम देने वाले नेपाल के रास्ते से ही आये हों।
नेपाली सामान हो सकती है असली वजह
उत्तराखंड में टनकपुर के पास पहाड़ों पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल मां पूर्णागिरि के मंदिर में हर साल लाखों लोग दर्शन करने जाते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा लोग मंदिर में दर्शन के बाद बॉर्डर पार नेपाल जाते हैं, जहां सिद्धनाथ बाबा का मंदिर। ऐसी मान्यता है कि सिद्धनाथ बाबा के मंदिर के दर्शन किये बगैर पूर्णागिरि के दर्शन अधूरे हैं। यही कारण है कि टनकपुर से बॉर्डर पार करने वालों की बहुत कम ही चेकिंग होती है, क्योंकि सिद्धनाथ बाबा के मंदिर के पास एक छोटा सा बाज़ार है, जहां से लोग सस्ते में नेपाली सामान खरीदना पसंद करते हैं।
एक-एक व्यक्ति हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक की खरीददारी करता है और अपने साथ भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान लाता है। अधिकांश लोगों के माथे पर मां की चुनरी बंधी होती है, तो बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स उन्हें मां के भक्त मान कर आसानी से जाने देती है। कुल मिलाकर देखा जाये तो नेपाल के रास्ते आने वाले आतंकवाद को अगर रोकना है, तो टनकपुर जैसी जगहों पर ज्यादा सख्ती करने की जरूरत है।












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