यूपीए के जिन्न से निकला वीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला

गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश किए जाने की जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले के बारे में इटली की सरकार से जानकारी मांगी गई है, लेकिन वहां की सरकार ने न्यायिक मामला बताते हुए जानकारी मुहैया कराने से मना कर दिया है।
इटली की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फिनमेक्केनिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गियूसेप्पे ओरसी को भारत को बेचे गए अगस्टा वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। 2010 में हुए 12 हेलीकॉप्टरों के सौदे में उन्होंने किसी प्रकार की गड़बड़ी करने से इनकार किया है।
कोर्रिएरे डेल्ला सेरा अखबार के ऑन लाइन संस्करण के मुताबिक भारत के साथ 12 हेलीकॉप्टरों का सौदा सुनिश्चित करने के लिए रिश्वत देने के आरोप में ओरसी को गिरफ्तार किया गया है। जांच के तहत इतालवी रक्षा फर्म के प्रमुख ब्रुनो स्पाग्नोलिनी सहित तीन लोग नजरबंद हैं। इटली के प्रधानमंत्री मारियो मोंटी ने इतालवी टीवी के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "फिलहाल फिनमेक्के निका के संचालन में समस्या है और हमें इसका सामना करना होगा।" उन्होंने कहा, "दंडाधिकारी अपना काम करेंगे। मैं आश्वस्त हूं कि वे इसे अच्छी तरह से करेंगे और हर संभव बेहतर तरीका अपनाएंगे।"
इधर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने मंगलवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, "रोम में स्थित भारतीय दूतावास ने इटली की सरकार से इस संबंध में उनके पास उपलब्ध जानकारी मुहैया कराने की मांग की है, लेकिन दूसरी ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।"
अकबरुद्दीन ने कहा कि उन्हें सूचित किया गया है कि यह एक न्यायिक प्रक्रिया है और इसलिए रोम इस मामले में कोई सूचना साझा नहीं कर सकता। दूसरी ओर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने के आदेश दिए हैं।
रक्षा मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि मीडिया में फिनमेक्कानिका की अनैतिक सौदेबाजी के बारे में इतालवी अभियोजकों की ओर से जांच शुरू करने के बारे में समय-समय पर रिपोर्ट आती रही है। जांच के दायरे में फरवरी 2010 में भारत के साथ हुए हेलीकॉप्टर आपूर्ति करार को भी शामिल करने की जानकारी मीडिया में आई है।
बयान में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट के आलोक में रक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से इटली और ब्रिटेन की सरकार से सूचना की मांग की है क्योंकि अगस्टा वेस्टलैंड फिनमेक्कानिका की सहायक कंपनी है।
विज्ञप्ति में रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "मेसर्स अगस्टा वेस्टलैंड के साथ हुए ठेका करार में रिश्वत के साथ-साथ अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल वर्जित करने का खास करार प्रावधान शमिल था। चूंकि दोनों सरकारों से अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है इसलिए रक्षा मंत्रालय ने इस मामले को सीबीआई को जांच के लिए सौंपने का फैसला लिया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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