मुर्दे की तरह जीना नहीं चाहता था अफजल गुरु

तिहाड़ के जेल नंबर 3 में दिए गए साक्षात्कार में अफजल ने कहा था, "जेल में जिंदगी नरक बन गई है। मैं सरकार से दो माह पहले ही सजा पर जल्द फैसला लेने की गुजारिश कर चुका हूं। मैं मुर्दे की तरह जीना नहीं चाहता।" पूरी दिलेरी के साथ उसने कहा था, "मैंने यह भी गुजारिश की है कि जिस घड़ी वे (सरकार) फैसला ले लें मुझे कश्मीर की जेल में स्थानांतरित कर दें।"
लेकिन उसकी यह इच्छा अधूरी ही रह गई। जम्मू एवं कश्मीर के सोपोर जिला निवासी अफजल को संसद पर 13 दिसंबर 2001 को हुए आत्मघाती हमले में साजिश रचने में मुख्य भूमिका निभाने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। हमले में नौ लोग मारे गए थे। जून 2008 में दिए गए साक्षात्कार के चार वर्ष से भी ज्यादा समय गुजर जाने के बाद शनिवार की सुबह तिहाड़ जेल में उसके सेल के बाहर फांसी दे दी गई।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पहले कार्यकाल पूरा होने से एक महीना पहले अफजल ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी लालकृष्ण आडवाणी उसकी दुर्दशा पर शीघ्र फैसला ले सकते हैं। मौजूदा सरकार उसकी मौत की सजा को लेकर दुविधा में है।
उसने कहा था, 'मैं नहीं समझता कि संप्रग सरकार किसी निश्चित फैसले पर पहुंच सकेगी। कांग्रेस के पास दो माह का वक्त बचा है और वह दोहरा गेम खेल रही है।' अफजल ने कहा था, "मेरी दिली तमन्ना है कि भारत के अगले प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बनें क्योंकि केवल वही मुझे फांसी पर लटकाने के बारे में फैसला ले सकते हैं। कम से कम उसके बाद मुझे दर्द और रोजाना की दुर्दशा से छुटकारा तो मिल जाएगा।"
जेल में अफजल से मुलाकात करने में आईएएनएस सफल रहा था। जेल अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं लगने दी थी कि अफजल का मुलाकाती एक पत्रकार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications