1984 के सिख दंगे को नरसंहार घोषित करने की मांग
वाशिंगटन। सिख अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले एक अमेरिकी संगठन ने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर नवम्बर 1984 में भारत में हुए सिख विरोधी दंगे को नरसंहार की संज्ञा दिए जाने की पैरवी की। यह संगठन इस सम्बंध में पहले ही ओबामा प्रशासन को एक आवेदन दे रखा है।
सिख फॉर जस्टिस(एसएफआई) के कानूनी सलाहकार गुरपटवंत सिंह पन्नू ने कहा है, "आम धारणा के विपरीत भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में फैले दंगे आम जनता के गुस्से का नतीजा नहीं थे।" उन्होंने आगे कहा है, "इसके विपरीत ये दंगे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की योजनाबद्ध, सुविचारित-राजनीतिक साजिश के हिस्से थे।"

संगठन ने अपनी याचिका में दंगा पीड़ितों के बयान तथा दूसरे प्रमाण भी प्रस्तुत किए हैं, जिसमें दंगे में मारे गए लोगों की 2011 में खोजी गई हरियाणा तथा दूसरे राज्यों में मिली सामूहिक कब्रें शामिल हैं। 46,000 लोगों के हस्ताक्षर के साथ यह आवेदन 15 दिसंबर को ओबामा प्रशासन को सौंपा गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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