बिहार भाजपा की नई टीम बनाने में कई बाधाएं

पटना। बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बिहार इकाई के अध्यक्ष का चुनाव भले ही सर्वसम्म्ति से हो गया हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व को नई टीम चुनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। भाजपा के एक नेता का हालांकि कहना है कि आने वाले कुछ समय में एक सशक्त टीम की घोषणा कर दी जाएगी।

बिहार भाजपा इकाई में 26 पदाधिकारी बनाए जाने हैं, जिसमें आठ से नौ सीट महिलाओं और तीन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में मात्र 13 से 14 पद ही ऐसे बचते हैं, जिन पर सामान्य जाति के नेताओं को बिठाया जा सकता है।

भाजपा के एक नेता की मानें तो इतने कम पदों पर ही जातीय, क्षेत्रीय, और नए-पुराने नेताओं के बीच संतुलन का खयाल रखना है। बिहार भाजपा की टीम में चार महामंत्री, 10 मंत्री और उपाध्यक्ष, एक संगठन मंत्री और एक कोषाध्यक्ष होते हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय मयूख ने कहा कि आने वाली नई टीम सशक्त और मजबूत हो, इसका पूरा खयाल रखा जाएगा और नए तथा पुराने नेताओं में सामंजस्य बनाया जाएगा। पार्टी में सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 लाख तक पहुंच गई है, जबकि सक्रिय सदस्यों की संख्या 60 हजार के करीब है। ऐसे में सभी को टीम में नहीं रखा जा सकता। लेकिन इतना तय है कि टीम गठित करने को लेकर कोई विवाद नहीं है।

भाजपा के ही एक अन्य नेता का दावा है कि नई टीम के गठन को लेकर राज्य के कई नेता दिल्ली और पार्टी के प्रमुख नेताओं के संपर्क में हैं। वैसे, भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर राजनाथ सिंह के आ जाने का प्रभाव भी बिहार समिति पर पड़ने की संभावना है। बिहार में नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मंगल पांडेय के चुने जाने को 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समिति की घोषणा नहीं की जा सकी है।

मयूख कहते हैं कि पुराने समय में नई समिति के गठन के लिए इससे भी अधिक समय लग जाता था। भाजपा सूत्रों की मानें तो पुराने अध्यक्ष सी़ पी़ ठाकुर की टीम के 25 से अधिक पदाधिकारियों को हटाए जाने की संभावना है, लेकिन नई समिति बनाने वाला 'थिंकटैंक' यह तय नहीं कर पा रहा है कि किसे रखे और किसे हटाए? थिंकटैंक इसका पूरा खयाल रख रहा है कि समिति को लेकर किसी तरह का बखेड़ा न हो जाए, जिसका खामियाजा आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी को उठाना पड़े।

पार्टी के कई नेता हालांकि यह भी कह रहे हैं कि प्रदेश कोर समिति के सदस्यों की संख्या बढ़ाने की बात भी चल रही है, ताकि समिति में बड़े और मेहनती नेताओं को पद देकर उन्हें संतुष्ट किया जा सके।

राजनीति के जानकार और 'बिहार टाइम्स' के संपादक अजय कुमार का कहना है कि नई समिति गठित करने में कठिनाई का एक बड़ा कारण गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का मुद्दा है।

मंगल पांडेय को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष इसलिए बनाया गया कि वह भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सरदर्द न बनें, क्योंकि पूर्व अध्यक्ष सी. पी. ठाकुर गाहे-बगाहे मोदी का नाम उछालते रहे थे। ऐसे में समिति में पहले के लोगों को बनाए रखने को लेकर थिंकटैंक को परेशानी पेश आ रही है।

अजय कुमार का यह भी कहना है कि बिहार भाजपा अभी यह तय नहीं कर पाई है कि वह आने वाले लोकसभा चुनाव में किस रणनीति को लेकर मैदान में उतरेंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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