विदेशी मेम को भा गया बिहारी दूल्हा

इस मौके पर सोंगा के परिजन भी दक्षिण कोरिया से मयंक के गांव आए थे और पूरे समारोह में बढ़-चढ़कर शिरकत किए। इस रिश्ते से न केवल सोंगा और मयंक खुश हैं बल्कि दोनों के परिजन भी काफी खुश हैं। मयंक के पिता माधव शरण तिवारी ने आईएएनएस को कहा कि भारतीय संस्कृति 'वसुधैव कुटुंबकम' पर विश्वास करती है, ऐसे में जाति और देश का बंधन रिश्तों पर भारी नहीं पड़ सकता। वे कहते हैं कि उनके लिए उनके पुत्र की खुशी सवरेपरि है।
वहीं, मयंक बताते हैं कि भारतीय संस्कृति के कायल सोंगा ने उनसे पढ़ाई के दौरान ही 2008 में विवाह का प्रस्ताव रखा था परंतु कुछ दिन पढ़ाई के कारण और कुछ दिन परिवार में सहमति नहीं बन पाने के कारण विवाह में विलंब हुआ।
मयंक पढ़ाई के लिए 2006 में दक्षिण कोरिया गए थे और सोंगा से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों में गहरी दोस्ती हो गई और फिर यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। मयंक बताते हैं कि सोंगा बिहार में 2007 में उस समय बेतिया आई थी, जब यहां बाढ़ का प्रकोप था। तब मयंक को लगा था कि यहां के हालात देखकर सोंगा फिर कभी बिहार नहीं आएगी। परंतु भारतीय संस्कृति को पसंद करने वाली सोंगा एक साल बाद फिर बिहार आई। इसके बाद उसने मयंक के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया।
अपनी सभ्यता और संस्कृति पर विश्वास करने वाले मयंक कहते हैं कि उनको अपने परिजनों के सामने सोंगा से विवाह करने का प्रस्ताव रखने में दो वर्ष लग गए थे। बहरहाल, दोनों परिवारों ने विवाह के लिए सहमति दी और गत सोमवार को बेतिया के एक निजी होटल में दोनों का विवाह संपन्न हुआ।
मयंक कहते हैं कि सोंगा हिंदी नहीं जानती है परंतु वह भोजपुरी और हिंदी भाषा सीख रही है। सोंगा ने भी टूटी-फूटी हिंदी में इस विवाह पर खुशी का इजहार किया तथा भारतीय संस्कृति की तारीफ की। मयंक वर्तमान समय में एक दक्षिण कोरियाई कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में भारत में देश प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं जबकि सोंगा स्टार सीजे इंडिया कंपनी में कार्यरत है। इस विवाह समारोह में शामिल सोंगा की मां ने भी इस विवाह पर प्रसन्नता व्यक्त की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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