ऐसा हुआ तो बढ़ जाएगी बेटियों की इज्जत

सुनने और देखने में भले ही यह अजीब लग रहा हो, लेकिन सचाई तो यही है कि अब इस गांव में लड़कियों की नहीं बल्कि लड़कों की विदाई होती है। दरअसल सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा ने लड़कियों को बचाने के लिए एक अनोखी मुहिम शुरु की है, इस मुहिम के तहत बेटियों के बजाय बेटों को ससुराल में जाकर रहना होगा। दुल्हन के मां-बाप को ही अपना मां-बाप समझकर उनकी सेवा करनी होगी। डेरा का विवादों से पुराना नाता रहा है लेकिन बेटियों को बचाने का उनका ये प्रयास सराहनीय है।
डेरा सच्चा सौदा ने कन्या भ्रूण हत्या और लड़कियों को लड़कों के बराबर सम्मान दिलाने के लिए ये मुहिम शुरु की है। संगठन ने इसे 'कुल का क्रॉउन' मुहिम का नाम दिया है। अपने 73वें अधिवेशन के दौरान डेरा सच्चा सौदा के अधिकारियों ने कहा कि हम मानवता की भलाई के लिए इस अभियान की शुरुआत कर रहे है। उनकी दलील है कि इस तरह की योजनाओं के बाद समाज में लड़कियों की स्थिति सुधरेंगी।
ये प्रयास भले ही अनोखा हो लेकिन इससे समाज में बदलाव तो जरुर आएगा। बेटियों की शादी, उनकी परवरिश और बाद में उनकी विदाई को लेकर उन्हें बोझ समझने वाले मां-बाप इस तरह की पहल के बाद अपनी मानसिकता को जरुर बदलेंगे।












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