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कुंभ मेले में तलवार-त्रिशूल लेकर क्‍यों आते हैं नागा साधू?

इलाहाबाद। संगम के तट पर चल रहे कुंभ मेले में देश भर से नागा बाबा गंगा में डुबकी लगाने के लिये आ रहे हैं। इनके हाथों में त्रिशूल, फरसा, तलवार, या फिर कोई अन्‍य धारदार हथियार जरूर देखने को मिलता है। कभी आपने सोचा है आखिर ऐसा क्‍यों? आखिर क्‍या कारण हैं, जो ये साधु अपने साथ हथियार लेकर चलते हैं?

इसका जवाब आपको इस लेख में मिलेगा। असल में ये शस्‍त्र उनके लिये आभूषण के समान होते हैं। अखाड़ा सभ्‍यता के अनुसार त्रिशूल और तल्‍वारें उनके लिये बहुत महत्‍वपूर्ण होती हैं। इनकी पूजा भी इन शस्‍त्रों के बगैर अधूरी मानी जाती है।

नागा साधू जितनी श्रद्धा के साथ गंगा में डुबकी लगाते हैं, उतनी ही श्रद्धा के साथ इन शस्‍त्रों की रात को पूजा करते हैं। ये लोग इन शस्‍त्रों की पूजा देवी-देवता के तौर पर करते हैं। नागा साधू अखाड़ा के देवेंद्र गिरी बताते हैं कि इतिहास गवाह है कि नागा साधू हमेशा से हिन्‍दू धर्म के रक्षक माने जाते हैं। मुगल शासन में जब मुसलमानों ने हिन्‍दू साधू-सन्‍यासियों को खत्‍म करने की धमकी दी थी, तब से शस्‍त्र रखने का चलन बढ़ गया।

आज अगर कुंभनगर में देखें तो जूना अखाड़ा में 108 फीट लंबा त्रिशूल लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस त्रिशूल का भार 33 कुंटल है, जिसका निर्माण पंजाब में हुआ था।

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