'राधे मां' को मिला क्लीन चिट, अब कुंभ में करेंगी शाही स्नान

राधे मां पर आरोप लगा था कि महामंडलेश्वर के उपाधी मिलने के बाद उन्होंने इस पद के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया। महामंडलेश्वर बनने के बाद भी उन्होंन अपने परिवार से संबंध बनाए रखे। इसके अलावा संत बनने से पहले का उनका जीवन भी विवादों में रहा है। इन्हीं सब आरोपों के बाद अखाड़े में उनके खिलाफ रोष फैल गया था, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव ने इस बात की गंभीरता को समझते हुए राधे मां के खिलाफ जांच समिति बना दी और जांच पूरा होने तक उन्हें अखाड़े से सस्पेंड कर दिया गया था।
इसी जांच कमेटी के एक सदस्य महामंडलेश्वर स्वामी पंचानंद गिरी ने राधे मां को निर्दोष करार दिया है, जिसके बाद से राधे मां के कुंभ में शाही स्नान का रास्ता खुल गया है। गैर करने वाली बात है कि जांच समिति के जिस सदस्य ने राधे मां को निर्दोष करार दिया है उन्होंने ही पिछले साल उनके महामंडलेश्वर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट महंत हरि गिरि को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक राधे मां के कुंभ में जाने का अंतिम फैसला महंत हरि गिरी ही करेंगे।
गौरतलब है कि राधे मां का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ और शादी के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपने आप को देवी का अवतार बताते हुए लोगों को दर्शन देना शुरु कर दिया। राधे मां का जीवन विवादों से घिरा हुआ है। फिलहाल अभी वो मुंबई के एक कारोबारी के घर रह रही है।












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